साढ़े सात सालों तक चलने वाली शनि की दशा को साढ़ेसाती कहते हैं। जब शनि एक राशि से दूसरी राशि तक भ्रमण करते हैं तो बहुत मंद गति से चलने के कारण ढाई साल में अपना चक्कर पूरा करते हैं। इसी तरह से तीन गुणा होने पर लोगों पर शनि की साढ़े साती लगती है। तो वहीं ढाई वर्ष की अवधि को ढैय्या कही जाता है। साढ़े साती और शनि की ढैय्या के कारण जातक को कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ता है। शनि की साढ़े साती होने पर कुछ उपाय करके आप शनिदेव को प्रसन्न कर सकते हैं और शनि के प्रकोप के कारण होने वाली परेशानियों से बच सकते हैं। ज्योतिष में साढ़ेसाती से बचने के कई कारगर उपाय बताए गए हैं।
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पीपल के पेड़ में जल चढ़ाएं (प्रतीकात्मक तस्वीर)
- फोटो : सोशल मीडिया
शनि की साढ़े साती के प्रभाव से बचने के लिए प्रतिदिन पीपल के वृक्ष की जड़ में जल देना चाहिए। संध्या के समय जब सूर्य ढल जाए तब पीपल की वृक्ष के नीचे सरसों के तेल के दीपक में थोड़े से काले तिल, उड़द डालकर जलाएं। एक लोहे की कील भी अर्पित करें। शनिवार के दिन दीपक अवश्य जलाएं।
अच्छे कार्य करने वालों से शनिदेव बहुत जल्दी प्रसन्न होते हैं। इसलिए प्रतिदिन पक्षियों के दाना और पानी डालें। अगर आप सक्षम हैं तो सात प्रकार का अनाज लेकर पक्षियों को खिलाएं। आप अपने घर की छत और दीवारों पर भी पक्षियों के लिए दाना-पानी रख सकते हैं या फिर किसी ऐसी जगह पर जाकर दाना डालें, जहां पर बहुत सारे पक्षी आते हो।
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काले कुत्ते को नियमित रुप से रोटी दें (प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : Pixabay
साढ़े साती के प्रभाव से बचने के लिए किसी काले कुत्ते को भोजन खिलाना चाहिए। लेकिन ध्यान रहे की कुत्ते के सात्विक भोजन ही कराएं। यह कार्य नियमित तौर पर करें।
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काले तिल और काली वस्तुओं का दान करें (प्रतीकात्मक तस्वीर)
कुष्ठ रोगियों को कंबल, काले रंग के वस्त्र, काली दाल, काले तिल और लोहे की चीजें दान करनी चाहिए। इन चीजों को नियमित रुप से दान करते रहना चाहिए। आप अपनी क्षमतानुसार दान कर सकते हैं।
शनिवार का दिन शनिदेव को समर्पित किया जाता है। इसलिए शनि की साढ़ेसाती के प्रभाव से बचने के लिए शनिबार को संध्या के समय काल रंग के आसन पर बैठकर शनि मंत्र का कम से कम 11 माला जाप करना चाहिए। ॐ प्रां प्रीं प्रौं स: शनैश्चराय नम: