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Surya Grahan 2020: इस समय से शुरू हो जाएगा ग्रहण, जानिए सबकुछ

Mon, 14 Dec 2020 11:58 AM IST
विनोद शुक्ला ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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surya grhan - फोटो : अमर उजाला
Surya Grahan 2020: वर्ष 2020 में पृथ्वी पर पड़ने वाला दूसरा सूर्य ग्रहण 14 दिसंबर को शाम 07 बजकर 03 मिनट पर प्रारम्भ होगा। रात्रि 08 बजकर 02 मिनट पर परम ग्रास शुरू हो जाएगा। ग्रहण का मध्य रात्रि 09 बजकर 39 मिनट पर और खग्रास की समाप्ति 11 बजकर 34 मिनट पर होगा जबकि मध्य रात्रि 12 बजकर 23 मिनट पर ग्रहण समाप्त हो जाएगा। भारत में यह ग्रहण दिखाई नहीं देगा। इसलिए यहां सूतक आदि का विचार नहीं किया जाएगा। यहां के जनमानस पर भी कोई दोष नहीं लगेगा।
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सूर्यग्रहण 2020
महर्षि अत्रि ने सूर्य को ग्रहण से मुक्ति दिलाई
ऋग्वेद के इस मंत्र 'एत त्वा सूर्य स्वर्भानुस्तमसा विध्यदासुरः । अक्षेत्र विद्यथा मुग्धो भुवनान्य दीधयुः ।।  में यह वर्णन मिलता है कि हे सूर्य ! असुर राहु ने आप पर आक्रमण करके अंधकार से जो आपको विद्ध कर दिया है उससे मनुष्य आपके रूप को समग्रता से देख नहीं पाए और अपने अपने कार्यक्षेत्रों में ठगे से हो गए। तब महर्षि अत्रि ने अपने अर्जित मंत्र शक्ति सामर्थ्य से अनेक मंत्रों द्वारा आप पर पड़ रही राहू की काली छाया को दूर कर आप का उद्धार किया। इंद्र ने भी महर्षि अत्रि की सहायता से राहु की माया से सूर्य की रक्षा की। इस प्रकार ग्रहण की छाया को दूर करने में समर्थ महर्षि अत्रि के संधान से अलौकिक प्रभाव का वर्णन वेद के अनेक मंत्रों से प्राप्त होता है। इस प्रकार सूर्य को ग्रहण से मुक्ति दिलाने के लिए सर्वप्रथम सर्वसमर्थ महर्षि अत्रि ही आचार्य माने गए हैं।
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surya grahan 2020
ग्रहण कितने तरह के होते हैं और कैसे लगते हैं 
अपने भ्रमण पथ पर चलते हुए चंद्रमा अमावस्या को सूर्य और पृथ्वी के बीच में आ जाते हैं और कभी-कभी तो तीनों एक सीध में होते हैं। तब सूर्य के प्रकाश को ढक लेते हैं जिससे सूर्यग्रहण हो जाता है। चंद्रमा पृथ्वी के उपग्रह और अपार दर्शक हैं जो स्वयं प्रकाशक न होने के कारण अप्रकाशित पिंड हैं। ये पृथ्वी की परिक्रमा करते हैं। ये कई बार पृथ्वी के इतने करीब आ जाते हैं कि उनके और बीच की दूरी का अंतर 121000 मील ही रह जाता है और कभी कभी इतने दूर चले जाते हैं कि इनके बीच की दूरी का अंतर 253000 मील हो जाता है। 

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Surya Grahan 14 Dec
अपने भ्रमण पथ पर चलते हुए चंद्रमा अमावस्या को सूर्य और पृथ्वी के बीच में आ जाते हैं। कभी कभी तो तीनों बिलकुल एक सीध में आकर सूर्य के प्रकाश को ढक लेते हैं, उस समय चंद्रमा का अप्रकाशित भाग हमारी ओर पड़ता है और उनकी हलकी परछाईं पृथ्वी पर पड़ती है ऐसे में सूर्य पृथ्वी के जितने भाग पर घनी छाया रहने से दिखाई नहीं देते उतने भाग पर सूर्य ग्रहण होता है। जब ये तीनों पूर्णतः एक सीध में आकर सूर्य के पूर्ण प्रकाश को ही ढक लेते हैं तब खग्रास अथवा पूर्ण सूर्यग्रहण कहा जाता है। 
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Solar Eclipse
यदि ये एक सीध में आने से कुछ बच जाएं तो खंडग्रास सूर्य ग्रहण होता है। जब इन तीनों के एक सीध में आने का कुछ अंश रह जाय तो कंकड़ सूर्य ग्रहण कहा जाता है। ग्रहण के दिन ॐ नमो नारायणाय, ॐ नमः शिवाय या ॐ नमो खखोल्काय का जप तुलसी अथवा रुद्राक्ष की माला से जप करना श्रेष्ठ फलदाई रहेगा।  

कहां दिखाई देगा सूर्य ग्रहण
यह सूर्य ग्रहण भारत में नहीं दिखाई देगा। इस कारण सूर्य ग्रहण का सूतक काल मान्य नहीं होगा। यह ग्रहण दक्षिण अमेरिका, साउथ अफ्रीका अटलांटिक, हिंद महासागर और प्रशांत महासागर के कुछ हिस्सों में दिखाई देगा।
 
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