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Sheetala Ashtami 2022: मां शीतला की पूजा करते समय जरूर पढ़ें ये स्तोत्र, हर मनोकामना होगी पूरी

Wed, 23 Mar 2022 03:16 PM IST
आशिकी पटेल ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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मां शीतला की पूजा करते समय जरूर पढ़ें ये स्तोत्र - फोटो : Twitter
हिंदू धर्म में प्रत्येक वर्ष चैत्र माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को शीतला अष्टमी मनाई जाती है। शीतला अष्टमी को बसौड़ा अष्टमी भी कहा जाता है। बसौड़ा शीतला माता को समर्पित लोकप्रिय त्योहार है। मां शीतला को आरोग्य प्रदान करने वाली देवी बताया गया है। साथ ही माता शीतला की पूजा करने से रोगों से भी मुक्ति मिलती है। अगर आप भी माता की कृपा के पात्र बनना चाहते हैं तो शीतला अष्टमी के दिन शीतलाष्टक स्तोत्र का पाठ जरूर करें। पौराणिक मान्यता है कि इसकी रचना भगवान शंकर ने जनकल्याण के लिए की थी। इसमें शीतला देवी की महिमा का गुणगान किया गया है। कहा जाता है कि यदि व्यक्ति रोजाना इस स्तोत्र का पाठ करे, तो उस पर हमेशा माता शीतला की कृपा बनी रहती है। अगर आप रोजाना नहीं कर सकते तो शीतला अष्टमी के दिन जरूर करें। इससे आपके सारे कष्ट दूर होने लगेंगे। 
शीतलाष्टक  स्तोत्र
ॐ श्रीगणेशाय नमः, ॐ श्री शीतलायै नम: 
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मां शीतला की पूजा करते समय जरूर पढ़ें ये स्तोत्र - फोटो : iStock
विनियोग
ॐ अस्य श्रीशीतला स्तोत्रस्य महादेव ऋषिः, अनुष्टुप् छन्दः, शीतली देवता, लक्ष्मी बीजम्, भवानी शक्तिः, सर्वविस्फोटक निवृत्तये जपे विनियोगः
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मां शीतला की पूजा करते समय जरूर पढ़ें ये स्तोत्र - फोटो : iStock
ऋष्यादि-न्यास
श्रीमहादेव ऋषये नमः शिरसि, अनुष्टुप् छन्दसे नमः मुखे, श्रीशीतला देवतायै नमः हृदि, लक्ष्मी (श्री) बीजाय नमः गुह्ये, भवानी शक्तये नमः पादयो, सर्व-विस्फोटक-निवृत्यर्थे जपे विनियोगाय नमः सर्वांगे। 

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मां शीतला की पूजा करते समय जरूर पढ़ें ये स्तोत्र - फोटो : iStock
ध्यान
ध्यायामि शीतलां देवीं, रासभस्थां दिगम्बराम्, मार्जनी-कलशोपेतां शूर्पालङ्कृत-मस्तकाम्। 
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मां शीतला की पूजा करते समय जरूर पढ़ें ये स्तोत्र - फोटो : iStock
मानस-पूजन
ॐ लं पृथ्वी-तत्त्वात्मकं गन्धं श्री शीतला-देवी-प्रीतये समर्पयामि नमः ॐ हं आकाश-तत्त्वात्मकं पुष्पं श्री शीतला-देवी-प्रीतये समर्पयामि नमः ॐ यं वायु-तत्त्वात्मकं धूपं श्री शीतला-देवी-प्रीतये समर्पयामि नमः ॐ रं अग्नि-तत्त्वात्मकं दीपं श्री शीतला-देवी-प्रीतये समर्पयामि नमः ॐ वं जल-तत्त्वात्मकं नैवेद्यं श्री शीतला-देवी-प्रीतये समर्पयामि नमः ॐ सं सर्व-तत्त्वात्मकं ताम्बूलं श्री शीतला-देवी-प्रीतये समर्पयामि नमः
मंत्र
इस मंत्र को 11 बार बोलें- 
ॐ ह्रीं श्रीं शीतलायै नमः
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मां शीतला की पूजा करते समय जरूर पढ़ें ये स्तोत्र - फोटो : iStock
ईश्वर उवाच
वन्दे अहं शीतलां देवीं रासभस्थां दिगम्बराम् मार्जनी कलशोपेतां शूर्पालं कृत मस्तकाम्
वन्देअहं शीतलां देवीं सर्व रोग भयापहाम् यामासाद्य निवर्तेत विस्फोटक भयं महत्
शीतले शीतले चेति यो ब्रूयाद्दारपीड़ितः विस्फोटकभयं घोरं क्षिप्रं तस्य प्रणश्यति
यस्त्वामुदक मध्ये तु धृत्वा पूजयते नरः विस्फोटकभयं घोरं गृहे तस्य न जायते
शीतले ज्वर दग्धस्य पूतिगन्धयुतस्य च प्रनष्टचक्षुषः पुसस्त्वामाहुर्जीवनौषधम्
शीतले तनुजां रोगानृणां हरसि दुस्त्यजान् विस्फोटक विदीर्णानां त्वमेका अमृत वर्षिणी
गलगंडग्रहा रोगा ये चान्ये दारुणा नृणाम् त्वदनु ध्यान मात्रेण शीतले यान्ति संक्षयम्
न मन्त्रा नौषधं तस्य पापरोगस्य विद्यते त्वामेकां शीतले धात्रीं नान्यां पश्यामि देवताम्
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मां शीतला की पूजा करते समय जरूर पढ़ें ये स्तोत्र - फोटो : iStock
फल-श्रुति
मृणालतन्तु सद्दशीं नाभिहृन्मध्य संस्थिताम् यस्त्वां संचिन्तये द्देवि तस्य मृत्युर्न जायते
अष्टकं शीतला देव्या यो नरः प्रपठेत्सदा विस्फोटकभयं घोरं गृहे तस्य न जायते
श्रोतव्यं पठितव्यं च श्रद्धा भक्ति समन्वितैः उपसर्ग विनाशाय परं स्वस्त्ययनं महत्
शीतले त्वं जगन्माता शीतले त्वं जगत्पिता शीतले त्वं जगद्धात्री शीतलायै नमो नमः
रासभो गर्दभश्चैव खरो वैशाख नन्दनः शीतला वाहनश्चैव दूर्वाकन्दनिकृन्तनः
एतानि खर नामानि शीतलाग्रे तु यः पठेत् तस्य गेहे शिशूनां च शीतला रूङ् न जायते
शीतला अष्टकमेवेदं न देयं यस्य कस्यचित् दातव्यं च सदा तस्मै श्रद्धा भक्ति युताय वै
इति श्रीस्कन्दपुराणे शीतलाअष्टक स्तोत्र संपूर्णम
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