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Shani Sade Sati: जानें कब और कैसे शुरू होती है शनि की साढ़ेसाती, इन राशियों पर है इसका प्रभाव

Mon, 14 Jun 2021 11:13 AM IST
विनोद शुक्ला ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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पुष्य, अनुराधा और उत्तराभाद्रपद नक्षत्र के स्वामी भी शनि देव होते हैं।
वैदिक ज्योतिष में सभी 9 ग्रहों का विशेष महत्व होता है। इन नौ ग्रहों में शनि ग्रह का बड़ा महत्व है। शनि को ज्योतिष में बहुत ही क्रूर ग्रह समझा जाता है, लेकिन यह सही नहीं है क्योंकि शनि व्यक्ति को उसके कर्मों के आधार पर शुभ या अशुभ फल प्रदान करते हैं। अगर कुंडली में शनि मजबूत होते हैं तो जातक को शुभ फल और जीवन में अच्छे परिणाम प्राप्त होते हैं। कुंडली में कमजोर शनि अशुभ फल देते हैं। इसके अलावा शनि सभी ग्रहों में सबसे मंद गति से चलने वाले ग्रह है जिस कारण से इनका शुभ अशुभ परिणाम लंबे समय तक चलता है। शनि किसी एक राशि में ढ़ाई वर्षो तक रहते हैं फिर उसके बाद अन्य राशि में अपनी राशि बदलते हैं। इस तरह से शनि को सभी 12 राशियों का एक चक्कर लगाने में लगभग 30 वर्षो का समय लगाते हैं। शनि की साढ़ेसाती, ढैय्या और महादशा लगने से जातकों को कई तरह की परेशानी से जूझना पड़ता है। शनि मकर और कुंभ राशि के स्वामी होते हैं। तुला राशि शनि की उच्च और मेष राशि शनि की नीच राशि मानी गई है। पुष्य, अनुराधा और उत्तराभाद्रपद नक्षत्र के स्वामी भी शनि देव होते हैं।
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shani dev
शनि की साढ़ेसाती
कुंडली में चंद्रमा जिस राशि में जिस डिग्री पर बैठा है उससे 45 डिग्री की पहले में जब गोचर का शनि आता है तो शनि की साढ़ेसाती शुरू होती है। यह 45 डिग्री के दायरे में आने के साथ शुरू होती है और चंद्रमा से आगे निकलकर 45 डिग्री दूर चली जाए, तब तक चलती है। यह समय कुल साढ़े सात साल का होता है, इसी कारण इसे साढ़ेसाती कहते हैं। एक राशि तीस डिग्री की होती है। शनि का एक राशि में भ्रमण ढाई साल का होता है। चंद्रमा के दोनों ओर डेढ़ डेढ़ राशि यानी 45 डिग्री तक इसका भ्रमण यह स्थिति पैदा करता है। यानि ढाई ढाई साल के तीन हिस्से किए जा सकते हैं।
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shani dev
धनु, मकर और कुंभ राशि पर साढ़ेसाती
शनिदेव इस समय मकर राशि में गोचर कर रहे हैं ऐसे में धनु,मकर और कुंभ राशि पर शनि की साढ़ेसाती का प्रभाव है। जबकि मिथुन और तुला राशि पर शनि की ढैय्या चल रही है। 2022 से शनि मकर राशि को छोड़कर स्वयं की राशि कुंभ में प्रवेश कर जाएंगे। शनि के कुंभ राशि में प्रवेश करते ही धनु राशि से शनि की साढ़ेसाती का अंत हो जाएगा। लेकिन ध्यान देने वाली बात है कि शनि 2022 में वक्री चाल से चलते हुए फिर से मकर राशि में गोचर करेंगे। शनि के मकर राशि में वक्री और मार्गी होने से कुछ समय के लिए धनु राशि पर साढ़ेसाती लगेगी।
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shani dev - फोटो : shani dev
2023 से पूर्णरूप से धनु राशि पर से शनि साढ़ेसाती खत्म हो जाएगी। 2025 में मकर राशि से शनि की साढ़ेसाती खत्म होगी। कुंभ राशि से पूरी तरह शनि की साढ़ेसाती 23 जनवरी 2028 को हटेगी।  कुंभ राशि पर शनि की साढ़ेसाती का पहला चरण चल रहा है। 
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