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आज से शनि चलेंगे मार्गी, जानिए क्या होता है ग्रहों का मार्गी या वक्री होना

Tue, 29 Sep 2020 02:20 PM IST
विनोद शुक्ला ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला
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shani transit 2020
सभी नौ ग्रहों में शनि सबसे मंद गति से चलने वाले ग्रह हैं। शनि जब भी अपनी राशि बदलते हैं या वक्री और मार्गी होते हैं तब इसका व्यापक प्रभाव पड़ता है। शनि 29 सितंबर से मार्गी हो गए हैं। इसके  पहले शनि मकर राशि में वक्री होकर चल रहे थे। ज्योतिष में ग्रहों का वक्री या मार्गी होने का मतलब ग्रह सीधी चाल से चलते हैं या उल्टी चाल से। जब कोई ग्रह किसी राशि में रहते हुए सीधी चाल से चलता है तो उसे मार्गी कहते हैं। वहीं जब ग्रह उल्टी दिशा में चलते है तो उसे वक्री कहते हैं। 

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ग्रह परिवर्तन अक्तूबर 2020
ग्रह का वक्री होना क्या होता है?
वक्री ग्रह से आशय जब कोई भी ग्रह अपनी सामान्य दिशा की बजाए उल्टी दिशा यानि विपरीत दिशा में चले तो इस अवस्था को ग्रह का वक्री होना कहा जाता है। हालांकि सूर्य और चंद्रमा कभी भी वक्री नहीं होते हैं। वहीं राहु-केतु सदैव वक्री चाल चलते हैं।
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ग्रह के मार्गी होने का अर्थ
वहीं मार्गी होने का मतलब जब कोई भी ग्रह अपनी सामान्य दिशा में चलता हो उसे ग्रह का मार्गी होना कहते है। समय-समय पर कई ग्रह वक्री से मार्गी और मार्गी से वक्री चाल चलते हैं।

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ग्रह गोचर
ग्रह गोचर क्या होते है?
अपनी सामान्य चाल से ग्रह का राशि परिवर्तन (एक राशि से दूसरी राशि में जाना) गोचर कहलाता है। सूर्य, चंद्रमा, मंगल, बुध, गुरु, शुक्र और शनि ग्रह अपनी गति के अनुसार समय-समय पर राशियां बदलते हैं। किसी व्यक्ति के जीवन में ग्रहों के गोचर का बहुत प्रभाव पड़ता है। 
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ज्योतिषशास्त्र में ग्रहों की भूमिका
वक्री और गोचर का प्रभाव
वक्री ग्रह के प्रभाव को लेकर ज्योतिष विद्वानों के भिन्न-भिन्न मत हैं। जैसे ज्योतिष विद्वानों का एक मत है कि वक्री ग्रह अपनी उल्टी चाल के कारण उच्च राशि में नीच का फल देता है तो नीच राशि में उच्च का फल देता है। जबकि एक अन्य मत यह भी है कि वक्री चाल में ग्रह सदैव नकारात्मक परिणाम देता है। वहीं गोचर में ग्रह उच्च राशि में अच्छे और नीच राशि में अशुभ फल देता है।  
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