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रक्षाबंधन के दिन लगेगा पंचक, दोष से बचने के लिए 5 दिन न करें ये काम

Wed, 14 Aug 2019 03:14 PM IST
विनोद शुक्ला ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला
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panchak
गुरुवार 15 अगस्त को रक्षा बंधन का त्योहार मनाया जाएगा। इस बार रक्षाबंधन भद्रा के दोष से मुक्ति रहेगा। जिसका मतलब है कि पूरे दिन राखी बांधने का शुभ समय रहेगा। बहनें अपने भाईयों की कलाई में सुबह से शाम तक पूरे दिन राखी बांध सकती है। हालांकि 15 अगस्त को पंचक भी शुरू हो रहा है। ज्योतिष में पंचक लगने को अशुभ माना जाता है। आइए जानते हैं पंचक और रक्षाबंधन एक दिन पड़ने से क्या होगा असर
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ज्योतिष के अनुसार पंचक में पांच नक्षत्र का योग होता है। जब चंद्रमा धनिष्ठा, शतभिषा, पूर्वाभाद्रपद, उत्तराभाद्रपद और रेवती नक्षत्र के चारों ओर भ्रमण करता है तो पंचक लगता है। इस काल को अशुभ माना जाता है। इसलिए माना जाता है कि पंचक के समय में यदि कोई अशुभ कार्य हो जाए तो वह 5 बार पुनः होता है। इस बार पंचक रक्षाबंधन के दिन है। हालांकि जब पंचक गुरुवार के दिन या बुधवार के दिन शुरू होता है तो उसे अशुभ नहीं माना जाता है। इसलिए रक्षा बंधन के लिए पंचक कोई बाधा नहीं रहेगा।

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पंचक पांच दिनों तक होता है जो वर्ष में कई बार आता है। ज्योतिषाशास्त्रियों के अनुसार पंचक भी अलग-अलग प्रकार के होते हैं। अगर पंचक का प्रारंभ रविवार से हो रहा होता है तो उसे रोग पंचक कहा जाता है। सोमवार के दिन शुरू पंचक को राज पंचक कहते हैं।

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जो पंचक मंगलवार को शुरू हो उसे अग्नि पंचक कहते हैं। इस दौरान आग लगने का भय रहता है। इस दौरान औजारों की खरीददारी, निर्माण या मशीनरी का कार्य नहीं करना चाहिए।
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ग्रह नक्षत्र
इसके अलावा मृत्यु पंचक और चोर पंचक होता है। मृत्यु पंचक शनिवार और चोर पंचक शुक्रवार को होता है। ये दोनों काफी घातक पंचक माने जाते है।
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पंचक में 5 काम नहीं करना चाहिए
- पंचक में चारपाई बनवाना अच्छा नहीं माना जाता। ऐसा करने से कोई बड़ा संकट खड़ा हो सकता है।
-  पंचक के दौरान जिस समय घनिष्ठा नक्षत्र हो उस समय घास, लकड़ी आदि जलने वाली वस्तुएं इकट्ठी नहीं करना चाहिए, इससे आग लगने का भय रहता है।
- पंचक के दौरान दक्षिण दिशा में यात्रा नही करनी चाहिए, क्योंकि दक्षिण दिशा, यम की दिशा मानी गई है।
- पंचक के दौरान जब रेवती नक्षत्र चल रहा हो, उस समय घर की छत नहीं बनाना चाहिए।
- पंचक में शव का अंतिम संस्कार करने से पहले किसी योग्य पंडित की सलाह अवश्य लेनी चाहिए। यदि ऐसा न हो पाए तो शव के साथ पांच पुतले आटे या कुश  से बनाकर अर्थी पर रखना चाहिए। 
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