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राहु-केतु इस महीने बदल रहे हैं अपनी राशियां, बुरे प्रभावों से बचना है तो करें ये काम

Thu, 17 Sep 2020 06:45 AM IST
रुस्तम राणा ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला
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राहु-केतु का राशि परिवर्तन 2020 - फोटो : Rohit Jha
राहु और केतु दोनों ही छाया ग्रह हैं जो 23 सितंबर को अपनी-अपनी राशि बदल रहे हैं। जहां राहु मिथुन राशि से वृष राशि में प्रवेश कर रहे हैं तो वहीं केतु धनु राशि से वृश्चिक राशि में आ रहे हैं। ये दोनों ही ग्रह साथ-साथ अपनी राशि परिवर्तन करते हैं और दोनों की चाल भी उल्टी दिशा में होती है।
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राहु-केतु का राशि परिवर्तन 2020 - फोटो : सोशल मीडिया
ज्योतिष शास्त्र में ऐसा कहा जाता है कि जिन जातकों के ऊपर राहु-केतु की कृपा बरसती है वे जातक कामयाबी की बुलंदियों पर होते हैं। वहीं जिन जातकों के लिए ये अशुभ होते हैं तो ये उन जातकों के लिए मुसीबतों का पहाड़ खड़ा कर देते हैं। लेकिन ज्योतिष शास्त्र में दोनों ग्रह की कृपा पाने और इसके अशुभ प्रभाव से बचने के लिए एक महाउपाय बताया गया है और वह है - भैरव देव की आराधना। ऐसे करें भैरव देव की आराधना..
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उड़द की दाल से बनी मिठाई का लगाएं भोग - फोटो : social media
उड़द की दाल से बनी मिठाई का लगाएं भोग
राहु-केतु से मिलने वाली पीड़ा को दूर करने के लिए भैरव उपासना से बड़ा कोई उपाय नहीं है। भगवान भैरव को प्रसन्न करने के लिए उड़द की दाल या इससे निर्मित मिष्ठान, दूध-मेवा का भोग लगाएं।

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भगवान भैरव को चमेली के पुष्प चढ़ाएं - फोटो : social media
भगवान भैरव को चमेली के पुष्प चढ़ाएं
भगवान भैरव को चमेली का पुष्प अतिप्रिय है, इसलिए भैरव को मनाने के लिए, उनकी कृपा पाने के लिए इस पुष्प का विशेष रूप से प्रयोग करें।
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जपें भैरव देव के नाम की माला - फोटो : सोशल मीडिया
प्रतिदिन 108 बार जपें भैरव देव के नाम की माला
भगवान भैरव जी की कृपा पाने के लिए उनके 108 नाम का एक माला जप प्रतिदिन करें। इस प्रभावी उपाय से साधक के सभी भय दूर और समस्याओं का समाधान निकल आता है।
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भैरव चालीसा करें पाठ - फोटो : अमर उजाला
भैरव चालीसा का करें पाठ
भगवान भैरव को प्रसन्न करने के लिए प्रतिदिन भैरव चालीसा का पाठ करें। इस उपाय से बड़े से बड़े कष्ट से मुक्ति मिल जाती है। श्रद्धा भाव से इस उपाय को करने पर कोर्ट कचहरी आदि विवादों में विजय मिलती है।

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भगवान शिव से है काल भैरव का संबंध - फोटो : SELF
भगवान शिव से है काल भैरव का संबंध
कालभैरव को भगवान शिव की क्रोधाग्नि का विग्रह रूप माना जाता है। इन्हें शिव का पांचवा अवतार माना गया है। इनके दो रूप है पहला बटुक भैरव जो भक्तों को अभय देने वाले सौम्य रूप में प्रसिद्ध है। वहीं भैरव का दूसरा स्वरूप अपराधिक प्रवृतियों पर नियंत्रण करने वाले भयंकर दंडनायक का है। भगवान भैरव के साधक या उसके परिवार पर किसी भी प्रकार की नकारात्मक ऊर्जा, जादू-टोने तथा भूत-प्रेत आदि का असर नहीं होता है।
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काशी के कोतवाल नाम से हैं प्रसिद्ध - फोटो : सोशल मीडिया
काशी के कोतवाल नाम से हैं प्रसिद्ध
काशी के कोतवाल के नाम से जाने जाने वाले भगवान भैरव अपने भक्त की रक्षा के लिए सदैव तत्पर रहते हैं। पृथ्वी पर मौजूद देवी के 51 शक्तिपीठ की रक्षा भी कालभैरव अपने 52 विभिन्न रूपों में करते हैं। किसी भी शक्तिपीठ के दर्शन भगवान भैरव के बगैर अधूरे माने गए हैं। भैरव की साधना करने वाला साधक सभी प्रकार के भय से मुक्त रहता है। 
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