ज्योतिष शास्त्र में नवग्रह को विशेष स्थान प्राप्त है। ज्योतिष के अनुसार इन नवग्रहों की स्थिति और गति हमारे जीवन पर शुभ और अशुभ प्रभाव पड़ता है। कहते हैं कि इन ग्रहों के प्रतिकूल होने पर जीवन में परेशानियां आनी शुरू हो जाती हैं। वैदिक ज्योतिष में राहु को नौ ग्रहों में से एक माना जाता है लेकिन अन्य सात ग्रहों की तरह इसका कोई भौतिक अस्तित्व नहीं है। राहु का वैदिक ज्योतिष में और धार्मिक दृष्टिकोण से बहुत महत्व है। राहु को भ्रम का ग्रह कहा जाता है। यह धुंधली दृष्टि, झूठी आशाएं और अंधविश्वास लाता है। राहु के प्रभाव में जातक ख़यालों में खोए हुए और दिन में स्वप्न देखने वाले हो सकते हैं। यह जातकों के जीवन पर बहुत गहरा प्रभाव डाल सकता है। यदि राहु किसी जातक की कुंडली के शुभ भाव में स्थित है तो सकारात्मक फल देता है और अशुभ भाव में स्थित है तो नकारात्मक फल प्रदान करता है। वैदिक ज्योतिष के अनुसार राहु एक प्रभावशाली ग्रह है जो जिस भी ग्रह के साथ युति करता है या फिर दृष्टि में आता है, उसके जैसा ही व्यवहार करने लगता है। इसके साथ ही यह जिस भी भाव में मौजूद रहता है, उस भाव के स्वामी की तरह व्यवहार करता है। आधुनिक दुनिया में राहु तकनीक और उन्नत तकनीक का प्रतिनिधित्व करता है। इसे अलग और लीक से हटकर सोचने की क्षमता का कारक माना जाता है।
राहु करेंगे मेष राशि में गोचर
वैदिक ज्योतिष में राहु को शनि के बाद सबसे धीमे गोचर करने वाला ग्रह माना जाता है। इसे एक राशि से गोचर में 1.5 वर्ष लगते हैं और यह वक्री गति में गोचर करते हैं। इस वर्ष राहु 12 अप्रैल 2022 को प्रातः 10:36 बजे वृषभ राशि से मेष राशि में गोचर करेंगे।