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Bhairavi Dak: भैरवी डाक क्या है ? क्यों वायरल हो रही है इस रहस्यमयी आवाज की भविष्यवाणी ?

Fri, 17 Apr 2026 11:45 AM IST
Megha Kumari शैली प्रकाश

सार

Bhairavi Dak: सोशल मीडिया पर भैरवी डाक की चर्चा तेजी से हो रही है, जो एक एक तांत्रिक और गूढ़ आध्यात्मिक परंपरा से जुड़ा शब्द है, जिसका संबंध विशेष रूप से मां भैरवी की साधना से माना जाता है। आइए इसके बारे में विस्तार से जानते हैं।
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Bhairavi Dak - फोटो : अमर उजाला
Bhairavi Dak: आजकल सोशल मीडिया पर 'भैरवी डाक' की बहुत चर्चा हो रही है और इसे लेकर लोगों में भारी जिज्ञासा है। ओडिशा की 'पंचसखा' परंपरा के 'भविष्य मालिका' ग्रंथ में इसका विस्तृत उल्लेख मिलता है। आइए जानते हैं, क्या है यह 'भैरवी डाक'।

कौन हैं माता भैरवी?
दस महाविद्याओं में माता भैरवी छठी महाविद्या हैं, जिन्हें 'त्रिपुर भैरवी' भी कहा जाता है। मां त्रिपुर भैरवी का स्वरूप अत्यंत उग्र और तेजस्वी है। वे चतुर्भुजी हैं और उनके हाथों में त्रिशूल, खप्पर, तलवार तथा कटा हुआ मस्तक सुशोभित है। लाल वस्त्र और मुंडमाला धारण करने वाली माता का यह स्वरूप विनाशकारी (बुराइयों का अंत करने वाला) और ममतामयी, दोनों ही है।
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ओडिशा की मालिका परंपरा के अनुसार, कलयुग के अंत में जब 'मीन राशि में शनि' का योग बनेगा, तब आकाश में माता की गर्जना सुनाई देगी। - फोटो : अमर उजाला
भैरवी डाक का अर्थ
'भैरवी' का शाब्दिक अर्थ है- वह शक्ति जो भरण, रमण और वमन (सृष्टि, पालन और संहार) का सामर्थ्य रखती हो। 'डाक' का अर्थ है- पुकार या भीषण गर्जना। 'भैरवी डाक' का अर्थ हुआ माता भैरवी की वह गर्जना, जो सामान्य बादलों की गड़गड़ाहट जैसी नहीं, बल्कि इतनी भयानक होगी कि उसे सुनकर हृदय कांप जाए।

कब सुनाई देगी भैरवी डाक ?
ओडिशा की मालिका परंपरा के अनुसार, कलयुग के अंत में जब 'मीन राशि में शनि' का योग बनेगा, तब आकाश में माता की गर्जना सुनाई देगी। मान्यताओं के अनुसार, पहली डाक चैत्र मास के किसी मंगलवार को 'निशीथ काल' (अर्धरात्रि) में सुनाई देगी।
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कहा जाता है कि जब पाप अपनी चरम सीमा पर होगा और प्रकृति का भयंकर दोहन होगा, तब ध्यानमग्न माता का ध्यान भंग हो जाएगा। - फोटो : Adobe Stock
क्यों सुनाई देगी यह गर्जना ?
कहा जाता है कि जब पाप अपनी चरम सीमा पर होगा और प्रकृति का भयंकर दोहन होगा, तब ध्यानमग्न माता का ध्यान भंग हो जाएगा। ध्यान भंग होने पर वे पहली 'डाक' (गर्जना) देंगी। दूसरी डाक में वे अपना स्थान छोड़ देंगी और तीसरी डाक में वे 'रक्तमुखा' (अत्यंत क्रोधित) हो जाएंगी। इसके बाद पृथ्वी पर सात दिनों के लिए गहरा अंधकार छा जाएगा।

भैरवी डाक, देउली बगड़, जानिबे आलाप दिने।
मालिका वचन न होइबे आन, देखिबे दुई नयन।।
अर्थ: जब देवालयों और मंदिरों में मर्यादाएं टूटेंगी, तब माता भैरवी क्रोध से 'डाक' देंगी। मालिका के ये वचन कभी मिथ्या नहीं होंगे और इसे सब अपनी आंखों से साक्षात घटित होते देखेंगे।
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Bhairavi Dak predictions - फोटो : adobe stock
कहां सुनाई देगी यह आवाज?
संत हरिदास जी की पुस्तक 'इंद्र गोविंद गीता' के पृष्ठ संख्या 390 पर उल्लेख है कि भगवान कल्कि के आगमन के समय यह गर्जना होगी:

भुवनेश्वरी भैरवी डाकिबे, शुणिबे चौदहपुर।
सेहि डाक सुणि पापी मरिबे, बांचिबे सुजन नर।।

अर्थ: माता भैरवी भुवनेश्वर (ओडिशा) में गर्जना करेंगी, जो चौदह लोकों तक सुनाई देगी। इस आवाज को सुनकर पापियों का अंत होगा, जबकि सज्जन पुरुष सुरक्षित रहेंगे। दैवीय शक्तियां सर्प रूप धरकर अधर्मियों का नाश करेंगी और चारों ओर घोर युद्ध तथा अंधकार का वातावरण होगा।
स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, यह गर्जना विशेष रूप से भुवनेश्वर, लिंगराज मंदिर, भद्रक और जाजपुर जैसे क्षेत्रों में अधिक प्रभावी होगी।

किसे सुनाई देगी भैरवी डाक?
मान्यता है कि यह भयानक ध्वनि केवल पापियों को ही सुनाई देगी। इसे सुनने मात्र से ही अधर्मियों की अकाल मृत्यु हो जाएगी या उनका हृदय फट जाएगा। बड़ी संख्या में होने वाली इन मौतों का कोई वैज्ञानिक कारण समझ नहीं आएगा। इसे प्रलय और युग परिवर्तन का अंतिम संकेत माना जाएगा। ओडिशा की स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, वर्ष 2018 से 2032 तक का समय 'युग परिवर्तन' का काल है। इस भारी विनाश के पश्चात ही भगवान कल्कि द्वारा 'सतयुग' की स्थापना होगी।

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