शनि 30 अप्रैल, मंगलवार को प्रातः 6:25 बजे वक्री हो रहे हैं तथा कुल 142 दिन की वक्री गति के बाद 18 सितम्बर, 2019 को पुनः मार्गी हो रहे हैं। सूर्य पुत्र शनि समस्त ब्रह्मांड के न्यायाधीश कहे जाते हैं। कई लोगों का मानना है कि जातक के जीवन में मुश्किलें और बाधाएं खड़ी करने का काम शनि महाराज करते हैं। लेकिन, वास्तव में शनिदेव व्यक्ति को उसके कर्मों के अनुसार फल देते हैं।
शनि का गोचर, साढ़ेसाती और महादशा का हमारे जीवन में बहुत महत्व होता है, क्योंकि इसके प्रभाव से मनुष्य के जीवन में बड़े परिवर्तन होते हैं, जैसे शादी, नौकरी, व्यवसाय, संतान आदि। हालांकि ये परिवर्तन सुखद और दुखद दोनों हो सकते हैं। यदि संक्षेप में देखा जाय तो शनि के वक्री होने से कारोबार में मंदी का समय रहेगा, राजनीतिक दलों के बीच मतभेद बढ़ेंगे, मौसम बहुत परिवर्तनशील रहेगा, आंधी तूफ़ान आएगा, अशांति का माहौल आदि फल अनुभव में आए हैं। साथ ही शेयर बाजार की स्थिति बहुत अच्छी नहीं रहती है। कुम्भ, वृषभ और तुला राशि को लाभ मिल सकता है। शनि का प्रभाव मनुष्य के करियर और आजीविका पर स्पष्ट रूप से पड़ता है।
बुध शुक्रवार, 3 मई को संध्या समय 5:12 बजे राशि परिवर्तन करते हुए मेष में प्रवेश करते हैं, जहां उच्चस्थ सूर्य गोचर कर रहे हैं। बुध को युवराज माना जाता है, जो बुद्धि के करक होते हैं। अपने नीचत्व से निकल जाने के कारण बुद्धि कौशल, वाकपटुता और समझने की शक्ति में निश्चित विकास होगा। ऐसे में देखते हैं वर्तमान गोचर विभिन्न राशियों पर क्या डालते हैं: