ग्रहों में जीवों की उत्पत्ति के कारक शुक्र 9 सितंबर की रात्रि 1 बजकर 40 मिनट पर
सिंह राशि की यात्रा पूर्ण करके
कन्या राशि में प्रवेश कर रहे हैं, जहां ये 3 अक्टूबर की मध्यरात्रि पश्चात 5 बजकर 13 मिनट तक रहेंगे। शुक्र वृषभ और
तुला राशि के स्वामी हैं मीन राशि इनकी उच्चराशि होती है तथा
मीन राशि से सातवीं कन्या राशि नीच राशि होती है।
कुंडली ज्योतिष में शुक्र विलासिता संबंधित सुखों, उत्तम स्वास्थ्य, बड़े डॉक्टर, महाप्रबंधक, भारी उद्योग, समुद्री वस्तुओं के व्यापार, खाद्य पदार्थ, होटल रेस्टोरेंट, एविएशन, हीरे जवाहरात एवं महंगी गाड़ियों के कारक होते हैं दांपत्य जीवन की शुभता-अशुभता, सौंदर्य, एक्टिंग, प्रेम-प्रसंग, फिल्म उद्योग एवं किसी भी तरह के मनोरंजक क्षेत्रों से लाभ दिलाने वाले शुक्र का जीवन में सर्वाधिक महत्व है इनका नीच राशिगत होना फलित ज्योतिष की बड़ी घटना है इसलिए सभी 12 राशियों पर इनका प्रभाव कैसा रहेगा इसका ज्योतिषीय विश्लेषण करते हैं।
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