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Somvati Amavasya 2026: 14 या 15 जून कब है सोमवती अमावस्या 2026? जानें सही तिथि और स्नान-दान का शुभ समय

Thu, 04 Jun 2026 01:01 AM IST
Jyoti Mehra धर्म डेस्क, अमर उजाला

सार

Somvati Amavasya 2026: जून में पड़ने वाली अमावस्या बेहद खास मानी जा रही है. क्योंकि इस दिन एक साथ कई संयोग बन रहे हैं। इस बार साल की पहली सोमवती अमावस्या अधिक मास में पड़ रही है, जिससे इसका फल कई गुना बढ़ जाएगा। हालांकि यह 14 जून को है या 15 जून को इस बीच असमंजस की स्थिति बनी हुई है। आइए जानते हैं इसकी सही तिथि और स्नान दान का समय। 
 
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सोमवती अमावस्या 2026 - फोटो : AI
Somvati Amavasya 2026 Date: हिंदू धर्म में अमावस्या तिथि को बेहद पवित्र और प्रभावशाली दिन माना जाता है, लेकिन जून में पड़ने वाली अमावस्या बेहद खास मानी जा रही है. क्योंकि इस दिन एक साथ कई संयोग बन रहे हैं। सोमवार के दिन पड़ने वाली अमावस्या को सोमवती अमावस्या कहा जाता है, जिसका महत्व कई गुना बढ़ जाता है। इसके अलावा इस वर्ष की पहली सोमवती अमावस्या अधिक मास में पड़ रही है, जो इसे और भी विशेष बना रही है। मान्यता है कि इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती की श्रद्धा पूर्वक पूजा करने से जीवन में सुख, शांति और समृद्धि का वास होता है तथा मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। साथ ही, यह दिन पितरों के तर्पण और श्राद्ध के लिए भी अत्यंत शुभ माना जाता है। अधिक मास के कारण इस दिन पवित्र नदियों में स्नान और दान करने से अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है।
 
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सोमवती अमावस्या 2026 कब है? - फोटो : adobe stock
सोमवती अमावस्या 2026 कब है?
पंचांग के अनुसार, इस बार सोमवती अमावस्या अधिक मास के कृष्ण पक्ष में पड़ रही है। अमावस्या तिथि की शुरुआत 14 जून, रविवार को दोपहर 12:20 बजे से होगी और इसका समापन 15 जून, सोमवार को सुबह 8:24 बजे होगा। उदया तिथि को ध्यान में रखते हुए 15 जून 2026 को सोमवती अमावस्या का व्रत रखा जाएगा और स्नान-दान किया जाएगा, जबकि पितृ कार्यों के लिए 14 जून का दिन अधिक उपयुक्त माना गया है।
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शुभ मुहूर्त - फोटो : adobe stock
शुभ मुहूर्त
अमावस्या तिथि प्रारंभ: 14 जून 2026, दोपहर 12:20 बजे
अमावस्या तिथि समाप्त: 15 जून 2026, सुबह 8:24 बजे
स्नान-दान का श्रेष्ठ समय: ब्रह्म मुहूर्त, सुबह 4:04 से 4:44 बजे तक
 

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सोमवती अमावस्या का महत्व - फोटो : adobe stock
सोमवती अमावस्या का महत्व
इस दिन विवाहित महिलाएं अपने पति की लंबी आयु और सुखी दांपत्य जीवन के लिए व्रत रखती हैं और भगवान शिव व माता पार्वती की पूजा करती हैं। साथ ही पीपल के वृक्ष की पूजा और उसकी परिक्रमा करने की परंपरा भी है। मान्यता है कि अमावस्या के दिन पवित्र नदी में स्नान और दान करने से व्यक्ति के पापों का क्षय होता है। इसके अलावा, इस दिन पितरों का तर्पण और श्राद्ध करने से पितृ दोष शांत होता है और पूर्वजों का आशीर्वाद प्राप्त होता है।
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Ashadha Amavasya 2025 - फोटो : adobe
क्या करें और क्या न करें
  • सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और दिन की शुरुआत पवित्रता के साथ करें।
  • भगवान शिव का अभिषेक करें और माता पार्वती की विधिपूर्वक पूजा करें।
  • पितरों के लिए तर्पण और श्राद्ध अवश्य करें।
  • जरूरतमंदों को दान देकर पुण्य अर्जित करें।
  • तामसिक भोजन से दूर रहें और किसी का अपमान करने से बचें।
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