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Shattila Ekadashi 2026: 13 या 14 जनवरी कब रखा जाएगा षटतिला एकादशी का व्रत? जानें पुण्यदायक व्रत की पूजा विधि

Wed, 07 Jan 2026 01:25 PM IST
ज्योति मेहरा धर्म डेस्क, अमर उजाला

सार

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार षटतिला एकादशी पर भगवान विष्णु को तिल से बने भोग अर्पित करने और तिल का दान करने से व्यक्ति के पाप और दोष नष्ट होते हैं तथा अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है। आइए जानते हैं षटतिला एकादशी की सही तिथि क्या है...
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षटतिला एकादशी 2026 - फोटो : Amar Ujala
Shattila Ekadashi Kab Hai: हिंदू पंचांग के प्रत्येक माह में आने वाली शुक्ल और कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि भगवान विष्णु को समर्पित मानी जाती है। इन तिथियों पर श्रीहरि की पूजा करने से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है। माघ मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी को षटतिला एकादशी कहा जाता है, जिसका महत्व सामान्य एकादशी की तुलना में अधिक माना जाता है। इस व्रत में तिल का विशेष स्थान है। 

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार षटतिला एकादशी पर भगवान विष्णु को तिल से बने भोग अर्पित करने और तिल का दान करने से व्यक्ति के पाप और दोष नष्ट होते हैं तथा अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है। यह व्रत लक्ष्मी नारायण की कृपा दिलाने और जीवन में सुख-समृद्धि बढ़ाने वाला माना जाता है। आइए जानते हैं षटतिला एकादशी की सही तिथि, शुभ मुहूर्त, पूजा विधि, पारण का समय और इसका धार्मिक महत्व।

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Mohini Ekadashi 2025 - फोटो : adobe stock
षटतिला एकादशी 2026 शुभ मुहूर्त
दृक पंचांग के अनुसार, षटतिला एकादशी का व्रत 14 जनवरी 2026, बुधवार को रखा जाएगा। माघ मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि 13 जनवरी 2026 को दोपहर 03:17 बजे शुरू होकर 14 जनवरी 2026 को शाम 05:52 बजे तक रहेगी। ऐसे में षटतिला एकादशी व्रत 14 जनवरी 2026, बुधवार को रखा जाएगा। वहीं व्रत का पारण 15 जनवरी 2026 को प्रातः 07:15 बजे से 09:21 बजे के बीच किया जाएगा।
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Mohini Ekadashi 2025 - फोटो : adobe stock
षटतिला एकादशी पूजा विधि
  • इस व्रत के दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करना शुभ माना जाता है। 
  • यदि गंगा स्नान संभव न हो, तो नहाने के पानी में गंगाजल मिलाकर स्नान करें। 
  • स्नान के बाद सूर्यदेव को अर्घ्य दें और मन में भगवान विष्णु का ध्यान करते हुए व्रत का संकल्प लें। 

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Varuthini Ekadashi 2025 - फोटो : adobe
  • इसके बाद पूजा स्थल में श्रीहरि को गंगाजल अर्पित करें और चंदन, पुष्प, फल, धूप-दीप व मिष्ठान चढ़ाएं। 
  • पूजा के दौरान एकादशी व्रत कथा का पाठ करें और अंत में भगवान विष्णु की आरती करें। 
  • तिल से बनी पंजीरी या पंचामृत का भोग लगाकर प्रसाद वितरित करें।
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षटतिला एकादशी का धार्मिक महत्व - फोटो : freepik
षटतिला एकादशी का धार्मिक महत्व
मान्यता है कि षटतिला एकादशी का विधिपूर्वक व्रत करने से भगवान विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त होती है। इस व्रत के प्रभाव से व्यक्ति के जीवन से दुख, दरिद्रता और नकारात्मकता दूर होती है। यह व्रत पापों का नाश कर सुख-समृद्धि प्रदान करता है। धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, इस व्रत के पुण्य से साधक को अंततः विष्णु लोक की प्राप्ति होती है। 


 
डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष और धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।
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