वैदिक ज्योतिष शास्त्र के अनुसार सभी ग्रहों के राशि परिवर्तन के लिहाज से शनि और गुरु का गोचर बहुत ही महत्वपूर्ण माना जाता है। गुरु को ज्योतिष में भाग्य, विवाह और सुख का कारक ग्रह माना गया है वहीं शनि को न्याय और क्रूर का देवता माना गया है। शनि ग्रह सभी ग्रहों में सबसे मंद गति से चलने वाले ग्रह हैं जो किसी एक राशि में करीब ढाई वर्षों तक रहते हैं। इस तरह से शनि राशिचक्र का एक पूरा चक्कर लगाने में करीब 30 वर्षों का समय लेते हैं। शनि इस समय अपनी मूल त्रिकोण राशि कुंभ में विराजमान हैं। शनि का गोचर अब साल 2025 में होगा जहां पर वे मीन राशि की यात्रा पर होंगे। आपको बता दें कि शनि के कुंभ राशि में रहने के कारण शश नामक राजयोग का निर्माण हुआ है। ज्योतिष में शश राजयोग को बहुत ही अच्छा राजयोग माना गया है। यह राजयोग पंचमहापुरुषों में एक माना गया है। शनि के कुंभ राशि में रहने की वजह से बना शश राजयोग कई राशि के लोगों को लाभ पहुंचाने की स्थिति में है।