शनिदेव को राशि चक्र में न्यायाधीश का दर्जा दिया गया है। शनि कर्म के अनुसार फल देते हैं। साथ ही सबसे धीमी गति से गोचर करने वाला ग्रह होने के कारण यह एक राशि में ढाई साल तक रहता है। साथ ही, राशिचक्र में भ्रमण करने में 30 वर्ष लग जाते हैं। अभी शनि अपनी कुम्भ राशि में हैं और मूल त्रिकोण स्थिति में हैं। शनि के स्वराशि में होने से शश नाम का राजयोग बना है।
शश पंच महापुरुष राजयोग में से एक होने के कारण कुछ जातकों को लाभ होगा। इन्हें भाग्य का पूरा सहयोग मिलेगा। साथ ही पारिवारिक स्तर पर परेशानियां दूर होंगी। वैदिक ज्योतिष के अनुसार, जब शनि तुला, मकर और कुंभ राशि में लग्न या चंद्रमा से पहले, चौथे , सातवें या 10वें घर में होता है, तो शश राजयोग पंच महापुरुष योग बनता है। जिन लोगों की कुंडली में शश राज योग होता है उन्हें समाज में सम्मान मिलता है। साथ ही भारत में कभी भी पैसों की कमी नहीं होती है।