फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Shardiya Navratri 2025: नवरात्रि के इस उपाय से शांत होते हैं ग्रह दोष, जानें कन्या पूजन का नवग्रहों से संबंध

Fri, 26 Sep 2025 12:36 PM IST
ज्योति मेहरा धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

मान्यता है कि कन्याओं में मां दुर्गा का रूप विद्यमान होता है, इसलिए उन्हें प्रसन्न करना माता की कृपा प्राप्त करने के समान होता है। इतना ही नहीं कन्या पूजन का नवग्रहों से भी संबंध बताया जाता है। आइए इसके बारे में विस्तार से जानते हैं। 
विज्ञापन
1 of 5
कन्या पूजन और नवग्रहों का संबंध - फोटो : Amar Ujala
Shardiya Navratri 2025: नवरात्रि का पावन पर्व पूरे देशभर में श्रद्धा और आस्था के साथ मनाया जा रहा है। इन नौ दिनों में मां दुर्गा के विभिन्न स्वरूपों की पूजा-अर्चना की जाती है। भक्त उपवास रखते हैं और धार्मिक अनुष्ठानों में शामिल होते हैं। नवरात्रि की अष्टमी और नवमी तिथि को कन्या पूजन की परंपरा निभाई जाती है, जिसे इस पर्व का एक प्रमुख हिस्सा माना जाता है।
Kanya Pujan 2025: कन्या पूजन में नवदुर्गा का प्रत्येक रूप है खास, जानें कंजक पूजन का महत्व और लाभ
इस दिन छोटी-छोटी कन्याओं को देवी का स्वरूप मानकर आमंत्रित किया जाता है और उनके चरण धोकर उनका पूजन किया जाता है। कन्याओं को प्रसाद स्वरूप भोजन कराया जाता है और अंत में दक्षिणा देकर विदा किया जाता है। मान्यता है कि कन्याओं में मां दुर्गा का रूप विद्यमान होता है, इसलिए उन्हें प्रसन्न करना माता की कृपा प्राप्त करने के समान होता है। इतना ही नहीं कन्या पूजन का नवग्रहों से भी संबंध बताया जाता है। आइए इसके बारे में विस्तार से जानते हैं। 
विज्ञापन

2 of 5
कन्या पूजन और नवग्रहों का संबंध - फोटो : adobe stock
कन्या पूजन और नवग्रहों का संबंध
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार कन्या पूजन न केवल धार्मिक दृष्टि से शुभ माना जाता है, बल्कि इसका सीधा संबंध हमारे नवग्रहों से भी होता है। सही विधि से कन्या पूजन करने पर ग्रह दोष शांत होते हैं और जीवन में सुख, समृद्धि, यश तथा सकारात्मक ऊर्जा का आगमन होता है। दरअसल कन्या पूजन के समय अर्पित किए जाने वाले प्रसाद और उपहार भी अलग-अलग ग्रहों का प्रतीक माने गए हैं।
  • कन्याओं को परोसी जाने वाली पूरी बृहस्पति ग्रह का प्रतीक मानी जाती है।
  • आटे का हलवा सूर्य का प्रतिनिधि है।
  • काले चने शनि ग्रह से जुड़ा माना जाता है।
  • कन्याओं के चरणों को धोने के लिए प्रयोग किया गया जल चंद्रमा का प्रतीक होता है।
विज्ञापन

3 of 5
कन्या पूजन और नवग्रहों का संबंध - फोटो : adobe stock
  • कन्याओं के हाथ पर बांधी जाने वाली मौली या कलावा मंगल ग्रह का प्रतीक है।
  • अर्पित किए गए जौ राहु का प्रतिनिधित्व करते हैं
  • दी गई चूड़ियां बुध का प्रतीक मानी जाती हैं।
  • बिंदी और दक्षिणा को शुक्र से जुड़ा माना जाता है।
  • कन्याओं के चरण स्पर्श करना केतु को संतुलित करता है।
इस प्रकार कन्या पूजन के माध्यम से भक्त अपने नौ ग्रहों को संतुलित कर माता दुर्गा की कृपा प्राप्त कर सकते हैं।

4 of 5
अष्टमी पर कन्या पूजन का शुभ मुहूर्त - फोटो : adobe stock
अष्टमी तिथि
नवरात्रि की अष्टमी पर कन्या पूजन का विशेष महत्व है। इस बार अष्टमी तिथि की शुरुआत 29 सितंबर को शाम 4 बजकर 31 मिनट पर होगी। तिथि का समापन 30 सितंबर को शाम 6 बजकर 6 मिनट पर होगा। उदया तिथि को मान्यता देते हुए, दुर्गा अष्टमी 30 सितंबर को मान्य होगी। इस दिन कन्याओं को देवी का स्वरूप मानकर पूजन और भोजन कराया जाता है।

अष्टमी पर कन्या पूजन का शुभ मुहूर्त
सुबह 5:00 से 6:12 बजे तक
सुबह 10:40 से 12:10 बजे तक
विज्ञापन
विज्ञापन

5 of 5
नवमी तिथि कन्या पूजन शुभ मुहूर्त - फोटो : adobe stock
नवमी तिथि
अष्टमी तिथि के समापन के बाद नवमी तिथि का आरंभ होगा और यह 1 अक्तूबर को शाम में 7 बजकर 2 मिनट तक रहेगी। ऐसे में नवमी 1 अक्तूबर 2025 को मनाई जाएगी। कई लोग कन्या पूजन नवमी को भी करते हैं। यह दिन शक्ति साधना का अंतिम दिन होता है। इस अवसर पर भी कन्याओं को आमंत्रित कर उनका पूजन और भोजन कराया जाता है।

नवमी तिथि कन्या पूजन शुभ मुहूर्त
सुबह 4:53 से 5:41 बजे तक
सुबह 8:06 से 9:50 बजे तक



डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें