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Kanya Pujan 2025: कन्या पूजन में नवदुर्गा का प्रत्येक रूप है खास, जानें कंजक पूजन का महत्व और लाभ

Thu, 25 Sep 2025 02:52 PM IST
ज्योति मेहरा ज्योतिषाचार्य पं.मनोज कुमार द्विवेदी

सार

कन्याएं स्वयं मां दुर्गा का ही रूप मानी जाती हैं। देवी भागवत में वर्णन है कि “जहां कन्याओं का पूजन होता है, वहां मां दुर्गा स्वयं प्रसन्न होकर वास करती हैं।” माना जाता है कि कन्याओं का श्रद्धा और भक्ति से पूजन करने और भोजन कराने से मां दुर्गा सभी मनोकामनाएं पूर्ण करती हैं
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नवरात्रि में कन्या पूजन कैसे करें? - फोटो : adobe stock
Kanya Pujan 2025: नवरात्रि भारत का प्रमुख धार्मिक पर्व है जो शक्ति की उपासना को समर्पित है। इस पर्व के नौ दिनों में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की आराधना की जाती है। नवरात्रि के अष्टमी और नवमी तिथि को कन्या पूजन का विशेष महत्व होता है। इसे कंजक पूजन भी कहा जाता है। इस परंपरा में छोटी-छोटी कन्याओं और एक छोटे बालक (लांगुरिया/भैरव) को आमंत्रित कर उन्हें भोजन कराया जाता है और उनका पूजन किया जाता है।
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शास्त्रों के अनुसार, कन्याएं स्वयं मां दुर्गा का ही रूप मानी जाती हैं। देवी भागवत में वर्णन है कि “जहां कन्याओं का पूजन होता है, वहां मां दुर्गा स्वयं प्रसन्न होकर वास करती हैं।” नवरात्रि के दौरान जब साधक नौ दिनों तक व्रत, भक्ति और अनुष्ठान करते हैं, तो कन्या पूजन को उस साधना का पूर्ण फल माना जाता है। माना जाता है कि जब कन्याओं को श्रद्धा और भक्ति से पूजन कर भोजन कराया जाता है, तो मां दुर्गा साधक की सभी मनोकामनाएं पूर्ण करती हैं और जीवन में सुख-समृद्धि प्रदान करती हैं।
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navratri thali Kanya Pujan - फोटो : adobe stock
नवदुर्गा का प्रत्येक रूप 
देवी भागवत में नौ कन्याओं को नवदुर्गा का प्रत्यक्ष विग्रह बताया गया है। उसके अनुसार नवकुमारियां भगवती के नवस्वरूपों की जीवंत मूर्तियां है। इसके लिए दो से दस वर्ष तक की कन्याओं का चयन किया जाता है। 
  • दो वर्ष की कन्या ‘कुमारिका’ कहलाती है, जिसके पूजन से धन-आयु-बल की वृद्धि होती है। 
  • तीन वर्ष की कन्या ‘त्रिमूर्ति’ कही जाती है। इसके पूजन से घर में सुख-समृद्धि का आगमन होता है। 
  • चार वर्ष की कन्या ‘कल्याणी’ के पूजन से विवाह आदि मंगल कार्य संपन्न होते हैं। 
  • पांच वर्ष की कन्या ‘रोहिणी’ की पूजा से स्वास्थ्य लाभ होता है। 
  • छह वर्ष की कन्या ‘कालिका’ के पूजन से शत्रु का दमन होता है। 
  • आठ वर्ष की कन्या ‘शांभवी’ के पूजन से दुःख-दरिद्रता का नाश होता है। 
  • नौ वर्ष की कन्या ‘दुर्गा’ पूजन से असाध्य रोगों का शमन और कठिन कार्य सिद्ध होते हैं। 
  • दस वर्ष की कन्या ‘सुभद्रा’ पूजन से मोक्ष की प्राप्ति होती है। 
देवी भागवत में इन नौ कन्या को कुमारी नवदुर्गा की साक्षात प्रतिमूर्ति माना गया है। दस वर्ष से अधिक आयु की कन्या को कुमारी पूजा में सम्मिलित नहीं करना चाहिए। कन्या पूजन के बिना भगवती महाशक्ति कभी प्रसन्न नहीं होतीं।
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नवरात्रि में कन्या पूजन कैसे करें? - फोटो : adobe stock
नवरात्रि में कन्या पूजन कैसे करें?
  • महाअष्टमी या महानवमी के दिन स्नान आदि करने के बाद भगवान गणेश और माता गौरी की पूजा करें।
  • इसके बाद कन्या पूजन के लिए 9 कन्याओं और एक बालक को भी आमंत्रित करें।
  • पूजा की शुरुआत कन्याओं के स्वागत से करें।
  • इसके बाद सभी कन्याओं के साफ पानी से पैर धोएं और साफ कपड़े से पोछकर आसन पर बिठाएं।
  • फिर कन्याओं के माथे पर कुमकुम और अक्षत का टीका लगाएं।

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नवरात्रि में कन्या पूजन कैसे करें? - फोटो : adobe stock
  • इसके बाद कन्याओं के हाथ में कलावा या मौली बांधें।
  • एक थाली के में घी का दीपक जलाकर सभी कन्याओं की आरती उतारें।
  • आरती उतारने के बाद कन्याओं को भोग में पूड़ी, चना, हलवा और नारियल खिलाएं।
  • भोजन के बाद उन्हें अपने सामर्थ्य अनुसार भेंट दें।
  • आखिर में कन्याओं के पैर छूकर उनसे आशीर्वाद जरूर लें।
  • अंत में उन्हें अक्षत देकर उनसे थोड़ा अक्षत अपने घर में छिड़कने को कहें।
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कन्या पूजन का महत्व - फोटो : adobe stock
कन्या पूजन का महत्व
हिंदू धर्म ग्रंथों के अनुसार, कन्या पूजन के लिए दो से दस साल तक की कन्या उपयुक्त होती हैं. दो से दस साल तक की कन्याएं मां दुर्गा के विभिन्न रूपों का प्रतिनिधित्व करती हैं. इसके अलावा लंगूर के रूप में एक बालक को भी इस पूजा में शामिल किया जाता है, जिसे भैरव बाबा या हनुमान जी का प्रतीक कहा जाता है। ऐसा कहा जाता है कि अष्टमी और नवमी तिथि पर कन्या पूजन करने से देवी दुर्गा प्रसन्न होती हैं और उनकी कृपा आपके परिवार पर सदा बनी रहती है।
 
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कन्या पूजन का महत्व - फोटो : adobe stock
कन्या पूजन के माध्यम से ऋषि-मुनियों ने हमें स्त्री वर्ग के सम्मान की ही शिक्षा दी है। नवरात्रि में देवी भक्तों को यह संकल्प लेना चाहिए कि वे आजीवन बच्चियों और महिलाओं को सम्मान देंगे और उनकी सुरक्षा के लिए सदैव प्रयत्नशील रहेंगे। तभी सही मायनों में नवरात्र की शक्ति पूजा संपन्न होगी।कन्या पूजन का सामाजिक दृष्टिकोण से भी गहरा महत्व है। यह परंपरा हमें नारी शक्ति और बालिकाओं के सम्मान का संदेश देती है। भारतीय संस्कृति में नारी को सृष्टि का आधार और मां के रूप में पूजा गया है। कन्या पूजन इस विचार को और सुदृढ़ करता है कि स्त्री शक्ति के बिना समाज का अस्तित्व अधूरा है। कन्याओं को सम्मान और पूजन करना समाज में कन्याओं के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण को बढ़ावा देता है। यह संदेश देता है कि बेटियाँ बोझ नहीं बल्कि शक्ति और सौभाग्य का प्रतीक हैं।

वैदिक विभूषण ज्योतिषाचार्य पं.मनोज कुमार द्विवेदी

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।
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