11 मई 2020 से शनि वक्री हो रहे हैं। वक्री चाल को उल्टी चाल भी कहते हैं। शनि इस समय मकर राशि में गोचर हैं, जहां पर अगले ढाई वर्षों तक रहेंगे। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार जब कोई ग्रह सीधी दिशा से चलते हुए उल्टी दिशा में चलने लगता है, तो इस गति को वक्री गति कहा जाता है। शनि देव मकर राशि में रहते हुए 11 मई से 29 सितंबर तक वक्री अवस्था में ही रहेंगे।
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार जब कोई ग्रह वक्री होता है तो इसका बुरा प्रभाव पड़ता है। इससे पहले 24 जनवरी 2020 को 30 वर्षों के बाद शनि स्वयं की राशि यानी मकर में आकर बैठ गए हैं। शनि बहुत ही धीमी गति से चलते हैं ऐसे में एक राशि से दूसरी राशि में जाने के लिए करीब ढाई वर्षो तक का समय लेते हैं।
शनि के वक्री होने पर उन राशि के जातकों पर ज्यादा असर देखने को मिलेगा जिन राशियों पर इस समय शनि की साढ़ेसाती या फिर ढैय्या चल रही है। शनि के मकर राशि में प्रवेश करने पर मौजूदा समय में धनु, मकर और कुंभ राशि पर शनि की साढेसाती चल रही है। वहीं मिथुन और तुला राशि के जातकों पर ढैय्या का प्रकोप है। आइए जानते हैं सभी 12 राशियों पर आगे आने वाले 30 वर्षों में कब-कब शनि का प्रकोप रहेगा।