शनि महाराज गणतंत्र दिवस यानी 26 जनवरी को वृश्चिक राशि से निकलकर धनु राशि में आएंगे। इस राशि में शनि का आगमन भारत, भारत की राजनीति, भारत की आर्थिक स्थिति और भारत की जनता के लिए कैसा रहेगा जानिए।
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गणतंत्र दिवस के दिन शनि का राशि परिवर्तन भारत पर क्या असर डालेगा
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ग्रह नक्षत्र
26 जनवरी को गोचर में शनि वृश्चिक राशि को छोड़कर धनु राशि में प्रवेश करने जा रहे हैं । बाद में इसी राशि में शनि 4 अप्रैल को वक्री होंगे और उलटी चाल चलते हुए फिर 20 जून को वृश्चिक राशि में प्रवेश करेंगे। फिर पुनः 31 अगस्त को मार्गी हो कर शनि सीधी चाल पकड़ कर बाद में 27 अक्टूबर को फिर से एक बार धनु राशि में प्रवेश करेंगे।
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नौ ग्रह
मेदिनी ज्योतिष में शनि का राशि परिवर्तन और वक्री होकर पिछली राशि में चले जाना देश-दुनिया में बड़े बदलाव आने का संकेत देता है। इस वर्ष शनि के साथ-साथ एक अन्य महत्वपूर्ण ग्रह गुरु भी काफी समय तक वक्री रहेंगे तथा बाद में राशि परिवर्तन करेंगे। इन दोनों बड़े ग्रहों के संयुक्त प्रभाव के कारण 4 फरवरी से लेकर 8 जून तक के मध्य शेयर बाजार में भारी उथल-पुथल होगी तथा विश्व के अनेक देशों विशेषकर भारत, पाकिस्तान, अफगानिस्तान, ईरान और चीन में कई स्थानों पर भूकंप के झटके महसूस किये जा सकते हैं।
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ग्रह नक्षत्र
15 अगस्त 1947 को आजाद हुए भारत की कुंडली वृषभ लग्न की है। आजाद भारत की कुंडली में शनि अष्टम भाव से गोचर करते हुए केंद्र सरकार को मुश्किल में डाल देगा। सरकार के कुछ विभागों पर अनियमितताओं और भ्रष्टाचार के आरोप लग सकते हैं। धनु में गोचर कर रहे शनि और कन्या राशि के वक्री गुरु साल की पहली छमाही में कपास और सोने-चांदी के दामों में तेजी का रुख लाएंगे।
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शनि
मैन्युफैक्चरिंग इंडस्ट्री में मंदी रहेगी, किन्तु कृषि के क्षेत्र में उत्पादकता में वृद्धि होगी। साल के आखिर में गुरु के तुला राशि में आने से सोने के दामों में गिरावट आएगी। शनि के धनु राशि में गोचर के प्रभाव से इस वर्ष रिकॉर्ड तोड़ गर्मी पड़ सकती है और वर्षा सामान्य रहेगी। साल के अंत में शनि पुनः मार्गी गति से धनु में आकर वैश्विक अर्थव्यस्था में मंदी लेकर आएंगे जिससे भारत भी अछूता नहीं रहेगा।
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शनि
अब हम 26 जनवरी 1950 को 10 बजकर 25 मिनट पर भारत के संविधान के लागू होने की कुंडली यानि भारतीय गणतंत्र की कुंडली पर नजर डालें तो इस वर्ष देश में बड़े संवैधानिक बदलाव आने के संकेत मिल रहे हैं। मीन लग्न की भारत के गणतंत्र की कुंडली के 10 वें भाव पर से शनि गोचर करेंगे।
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ग्रह नक्षत्र
शनि के गोचर तथा 10 वें भाव को प्रभाव में लिए हुए गुरु में बुध की विंशोत्तरी दशा के प्रभाव से देश में व्यापार, टैक्स व्यवस्था और सरकारी नाौकरियों में भर्ती से संबंधित कई नए कानून पारित होंगे। जुलाई में अपना कार्यकाल पूरा करने जा रहे प्रणव मुखर्जी के स्थान पर किसी बड़े लेखक या विद्धान व्यक्ति के नए राष्ट्रपति बनाने के ज्योतिषीय योग भी भारत की गणतंत्र की कुंडली में दिख रहे हैं।
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