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ज्योतिष में शनि ग्रह
ज्योतिषशास्त्र में कुंडली का अध्ययन करने के लिए कुंडली में शनि की स्थिति, दशा, महादशा, अंतर्दशा, शनि की साढ़ेसाती और ढैय्या आदि देखा जाता है। शनि ग्रह को न्याय का देवता कहा गया है। शनि मकर और कुंभ के स्वामी हैं। शनि तुला में उच्च और मेष राशि में नीच भाव में होते हैं। कुंडली में शनि की महादशा 19 वर्ष की होती है। शनि सभी ग्रहों में सबसे धीमी चाल से चलते हैं। यह एक राशि से दूसरी राशि में जाने तक ढाई वर्ष का समय लेते हैं। ऐसे में किसी राशि पर शनि की साढ़ेसाती सात साल की होती है। जिस किसी भी जातक पर शनि की साढ़ेसाती और ढैय्या के प्रभाव से व्यक्ति के जीवन में कई प्रकार की परेशानियां आती हैं। लेकिन वहीं दूसरी तरफ जिस व्यक्ति के लिए शनि शुभ होता है वह मालामाल हो जाता है।