ज्योतिष शास्त्र में शनि ग्रह की विशेष भूमिका होती है। जब कुंडली में शनि शुभ हो तो ऐसे जातक का जीवन संवार देते हैं वहीं जब कुंडली में शनि अशुभ स्थिति में हो तो शनि जीवन में तरह-तरह के कष्ट देते हैं। शनि सभी ग्रहों में सबसे मंद गति से चलने वाले ग्रह होते हैं। ये एक से दूसरी राशि में गोचर करने के लिए करीब ढाई वर्षों का समय लेते हैं। इस तरह से शनि एक राशि में दोबारा आने के लिए 30 वर्षों का समय लगाते हैं। आपको बता दें शनि बीते 29 मार्च को अपनी राशि परिवर्तन करते हुए कुंभ से मीन राशि में प्रवेश कर चुके हैं। शनि के मीन राशि में गोचर करने के बाद अब शनि जुलाई में वक्री होने जा रहे हैं। वक्री होने का मतलब उल्टी चाल से होता है। शनि के वक्री होने से इसका प्रभाव सभी राशियों के जातकों पर पड़ेगा शनि के वक्री होने तीन राशियां ऐसी हैं जिनको इसका लाभ सबसे ज्यादा मिलेगा। आइए जानते हैं कौन सी हैं वे भाग्यशाली राशियां।