Shani Vakri 2022 : आज 30 मई 2022 को शनि जयंती का त्योहार है,फिर इसके फौरन बाद ही शनि की उल्टी चाल शुरू हो जाएगी। 05 जून 2022 को शनि स्वराशि यानी कुंभ में वक्री होंगे। यहां वक्री का अर्थ उल्टी चाल से है यानी शनिदेव कुंभ राशि में पीछे की ओर चलते हुए भ्रमण पर रहेंगे। वहीं फिर 12 जुलाई को दोबारा से मकर राशि में आ आएंगे। जहां पर ये पूरे साल मकर राशि में ही विराजमान रहेंगे। इसके बाद 17 जनवरी 2023 को एक बार फिर से लंबे समय तक कुंभ राशि की यात्रा पर रहेंगे। 05 जून से शनि की वक्री चाल से देश-दुनिया समेत सभी राशियों पर प्रभाव पड़ेगा।
ज्योतिष में शनि का महत्व
ज्योतिषशास्त्र में शनि का महत्व काफी माना जाता है। शनि सभी ग्रहों में सबसे मंद गति से चलने वाले ग्रह है जिस कारण से यह जब भी किसी एक राशि में होते हैं तो करीब वहां पर ढाई वर्षों का लगाते हैं। शनि के 29 अप्रैल को कुंभ राशि में परिवर्तन के बाद अब वक्री होने जा रहे हैं। वक्री चाल से मतलब उल्टी चाल का चलना होता है। शनि जब अपनी उल्टी चाल से चलते हैं तो इसका प्रभाव सभी जातको के जीवन पर अवश्य ही पड़ता है। इसके साथ ही देश-दुनिया पर भी इसका प्रभाव पड़ता है। ज्योतिष में सूर्य और चंद्रमा को छोड़कर सभी ग्रह वक्री चाल चलते हैं। ज्योतिष में शनि ग्रह को न्याय और कर्मफलदाता कहा जाता है। जिन व्यक्तियों के जीवन में शनि शुभ भाव में होते है वह उन्हें सदैव अच्छा फल प्रदान करते हैं वहीं अगर किसी व्यक्ति की कुंडली में शनि अशुभ भाव में हो तो व्यक्ति के जीवन में काफी परेशानियां और उथल-पुथल रहती है।