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Sakat Chauth 2026: शुभ योग में सकट चौथ आज, जानें पूजा मुहूर्त और व्रत कथा

Tue, 06 Jan 2026 07:31 AM IST
मेघा कुमारी ज्योतिषाचार्य पं.मनोज कुमार द्विवेदी

सार

Sakat Chauth 2026: हिंदू धर्म में सकट चौथ का विशेष महत्व माना गया है। यह व्रत संतान की लंबी आयु, सुख-समृद्धि और संकटों के निवारण के लिए रखा जाता है। यह तिथि भगवान गणेश और सकट माता को समर्पित मानी जाती है।
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Sakat Chauth 2026 - फोटो : अमर उजाला
Sakat Chauth 2026: सनातन परंपरा में संतान की लंबी उम्र और सुख-समृद्धि के लिए सकट चौथ व्रत का बहुत ज्यादा महत्व माना गया है। माघ मास के कृष्णपक्ष की चतुर्थी तिथि को मनाए जाने वाले इस व्रत को तिलवा चौथ, तिल-कुटा चौथ, माघी चौथ, वक्र-तुण्ड चतुर्थी आदि के नाम से भी जाना जाता है। यह व्रत सकट माता, भगवान गणेश और चंद्र देवता की पूजा-अर्चना और व्रत से जुड़ा है। सकट चौथ का पर्व अत्यंत ही पुण्यदायी माना गया है।
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यह व्रत माघ मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को रखा जाता है और इसे करने से विघ्नहर्ता गणेश सभी बाधाएं हर लेते हैं। - फोटो : amar ujala
सकट चौथ का महत्व
सकट चौथ (संकष्टी चतुर्थी) का धार्मिक महत्व संतान की लंबी आयु, सुख-समृद्धि और सभी संकटों (बाधाओं) को दूर करने के लिए भगवान गणेश और सकट माता को समर्पित है, जिसमें महिलाएं बच्चों की खुशहाली के लिए व्रत रखती हैं, तिल-कुटा का भोग लगाती हैं और चंद्रोदय के बाद चंद्रमा को अर्घ्य देकर व्रत खोलती हैं। यह व्रत माघ मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को रखा जाता है और इसे करने से विघ्नहर्ता गणेश सभी बाधाएं हर लेते हैं। व्रती महिलाएं चंद्र दर्शन कर व्रत का पारण करती हैं, सकट चौथ को तिल-कुटा चौथ इसलिए कहा जाता है क्योंकि इस दिन तिल का विशेष महत्व होता है। महिलाएं पूजा के दौरान तिल का पहाड़ बनाती हैं, जो जीवन की बाधाओं का प्रतीक माना जाता है। पूजा के समय चांदी के सिक्के से तिल के ढेर को बीच से काटकर संतान के मंगल और उज्ज्वल भविष्य की कामना की जाती है। इस दिन चंद्र देव के दर्शन और पूजन से मानसिक कष्ट दूर होते हैं तथा जीवन में शांति और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
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माघ कृष्ण चतुर्थी तिथि 6 जनवरी 2026 को सुबह 8:01 बजे से शुरू होकर 7 जनवरी 2026 को सुबह 6:52 बजे तक रहेगी। - फोटो : freepik
सकट चौथ 2026
माघ कृष्ण चतुर्थी तिथि 6 जनवरी 2026 को सुबह 8:01 बजे से शुरू होकर 7 जनवरी 2026 को सुबह 6:52 बजे तक रहेगी। चूंकि 6 जनवरी को चंद्रोदय चतुर्थी तिथि में हो रहा है और 7 जनवरी को पंचमी तिथि में, इसलिए व्रत 6 जनवरी मंगलवार को ही रखा जाएगा। इसी दिन श्री गणेश जी की पूजा और शाम को चन्द्रोदय के समय तिल, गुड़ आदि का अर्ध्य चन्द्रमा को दिया जाता है। तिल को भूनकर गुड़ के साथ कूट लिया जाता है। तिलकुट का पहाड़ बनाया जाता है। कहीं-कहीं तिलकुट का बकरा भी बनाया जाता है। उसकी पूजा करके घर का कोई बच्चा तिलकुट बकरे की गर्दन काट देता है। कथा सुनायी जाती है फिर सबको उसका प्रसाद दिया जाता है।

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Sakat Chauth 2026 Subh Muhurat - फोटो : freepik
सकट चौथ शुभ योग
6 जनवरी मंगलवार को सकट चौथ के दिन सर्वार्थ सिद्धि योग सुबह 7:15 से दोपहर 12:17 बजे तक रहेगा। प्रीति योग पूरे दिन रहेगा और रात 8:21 बजे के बाद आयुष्मान योग शुरू होगा। इस दिन अश्लेषा नक्षत्र दोपहर 12:17 बजे तक रहेगा, उसके बाद मघा नक्षत्र का आरंभ होगा। ये योग पूजा-पाठ के लिए अनुकूल माने जाते हैं।
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सकट चौथ व्रत कथा - फोटो : अमर उजाला
सकट चौथ व्रत कथा
हिंदू पौराणिक कथाओं के अनुसार, भगवान गणेश अपने भक्तों की बाधाओं को दूर करने और किसी भी संकट (संकट/सकट) को हल करने के लिए जाने जाते हैं। इस त्यौहार का नाम भी सकट चौथ है। कथा के अनुसार एक दिन, माता पार्वती स्नान करने गईं और उन्होंने भगवान गणेश को बाहर पहरा देने और किसी को भी अंदर न आने देने का आदेश दिया। अपनी माता के निर्देश का पालन करते हुए, उन्होंने भगवान शिव को भी अंदर नहीं आने दिया, जिससे भगवान शिव क्रोधित हो गए और उन्होंने गणेश का सिर काट दिया। जब पार्वती ने अपने पुत्र की यह अवस्था देखी, तो वे रोने लगीं और अपने पति से गणेश को पुनर्जीवित करने की विनती की। अनेक प्रयासों के बाद, एक हाथी का सिर काटकर गणेश को दूसरा जीवन दिया गया। उसी दिन, उन्हें किसी भी उत्सव या आरंभ के दौरान सर्वप्रथम पूजा जाने का स्थान प्राप्त हुआ। सकट चौथ पर, उन्हें सभी देवताओं का आशीर्वाद प्राप्त होता है और इसलिए यह दिन भगवान गणेश की पूजा के लिए शुभ माना जाता है।


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डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। 
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