यह व्रत माघ मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को रखा जाता है और इसे करने से विघ्नहर्ता गणेश सभी बाधाएं हर लेते हैं।
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सकट चौथ का महत्व
सकट चौथ (संकष्टी चतुर्थी) का धार्मिक महत्व संतान की लंबी आयु, सुख-समृद्धि और सभी संकटों (बाधाओं) को दूर करने के लिए भगवान गणेश और सकट माता को समर्पित है, जिसमें महिलाएं बच्चों की खुशहाली के लिए व्रत रखती हैं, तिल-कुटा का भोग लगाती हैं और चंद्रोदय के बाद चंद्रमा को अर्घ्य देकर व्रत खोलती हैं। यह व्रत माघ मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को रखा जाता है और इसे करने से विघ्नहर्ता गणेश सभी बाधाएं हर लेते हैं। व्रती महिलाएं चंद्र दर्शन कर व्रत का पारण करती हैं, सकट चौथ को तिल-कुटा चौथ इसलिए कहा जाता है क्योंकि इस दिन तिल का विशेष महत्व होता है। महिलाएं पूजा के दौरान तिल का पहाड़ बनाती हैं, जो जीवन की बाधाओं का प्रतीक माना जाता है। पूजा के समय चांदी के सिक्के से तिल के ढेर को बीच से काटकर संतान के मंगल और उज्ज्वल भविष्य की कामना की जाती है। इस दिन चंद्र देव के दर्शन और पूजन से मानसिक कष्ट दूर होते हैं तथा जीवन में शांति और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।