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Sun in Astrology: यह एक उपाय कुंडली में सूर्य को बनाता है मजबूत, हर क्षेत्र में मिलता है सम्मान

Tue, 24 Jun 2025 05:19 PM IST
मेघा कुमारी ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला

सार

Sun in Astrology: नवग्रहों में सूर्य को राजा का दर्जा प्राप्त है। वह आत्मा, मान, सम्मान, इच्छाशक्ति, अधिकार और उच्च पदों के कारक ग्रह भी हैं। कुंडली में उनकी स्थिति मजबूत होने पर व्यक्ति के आत्मविश्वास में वृद्धि होती है।
 
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Importance of Sun in Astrology - फोटो : freepik
Importance of Sun in Astrology: आमतौर पर हमारे आसपास कुछ ऐसे लोग होते हैं, जो बोलने में माहिर, ऊर्जावान, निडर और निर्णय लेने में बेहतर होते हैं। इनका आत्मविश्वास अक्सर लोगों को प्रभावित करता है। इसके अलावा ऐसे लोग लगभग हर क्षेत्र में सफलता भी हासिल करते हैं। इन जातकों की ये खूबी इन्हें सबसे अलग बनाने में कारगर सिद्ध होती हैं। हालांकि इसे ज्योतिष में सूर्य का प्रभाव माना जाता है। दरअसल, नवग्रहों में सूर्य को राजा का दर्जा प्राप्त है। वह आत्मा, मान, सम्मान, इच्छाशक्ति, अधिकार और उच्च पदों के कारक ग्रह भी हैं।

कुंडली में उनकी स्थिति मजबूत होने पर व्यक्ति के आत्मविश्वास में वृद्धि होती है। यही नहीं सूर्य के प्रभाव से ये लोग नौकरी-बिजनेस में सम्मान भी प्राप्त करते हैं। चूंकि सूर्य ग्रहों के राजा हैं, इसलिए व्यक्ति की नेतृत्व क्षमता भी बेहतर होती हैं। परंतु स्थिति कमजोर होने पर काम में असफलता, आत्मविश्वास की कमी, पिता के साथ संबंधों में दिक्कतें आदि समस्याएं आने लगती हैं। लेकिन रोजाना सूर्य को जल चढ़ाने से सूर्यदेव प्रसन्न होते हैं। इस दौरान सूर्य मंत्रों का जप करना और भी लाभकारी होता है। इससे कुंडली में सूर्य की स्थिति मजबूत और सभी तरह के दोष दूर होते हैं। ऐसे में आइए इन मंत्रों के बारे में विस्तार से जानते हैं।
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Importance of Sun in Astrology - फोटो : Adobe Stock
सूर्य देव के मंत्र
  • ॐ घृणिं सूर्य्य: आदित्य:
  • ॐ ह्रीं ह्रीं सूर्याय सहस्रकिरणराय मनोवांछित फलम् देहि देहि स्वाहा
  • ॐ ऐहि सूर्य सहस्त्रांशों तेजो राशे जगत्पते, अनुकंपयेमां भक्त्या, गृहाणार्घय दिवाकर:
  • ॐ ह्रीं घृणिः सूर्य आदित्यः क्लीं ॐ 
  • ॐ ह्रीं ह्रीं सूर्याय नमः 
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Importance of Sun in Astrology - फोटो : Adobe Stock
  • ॐ सूर्याय नम: 
  • ॐ घृणि सूर्याय नम: 
  • ॐ भास्कराय नमः 
  • ॐ अर्काय नमः 
  • ॐ सवित्रे नमः
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Importance of Sun in Astrology - फोटो : adobe stock
श्री सूर्य चालीसा
 दोहा
 
कनक बदन कुंडल मकर, मुक्ता माला अंग।
पद्मासन स्थित ध्याइए, शंख चक्र के संग।।
 
चौपाई
जय सविता जय जयति दिवाकर, सहस्रांशु सप्ताश्व तिमिरहर।
भानु, पतंग, मरीची, भास्कर, सविता, हंस, सुनूर, विभाकर।
 
विवस्वान, आदित्य, विकर्तन, मार्तण्ड, हरिरूप, विरोचन।
अम्बरमणि, खग, रवि कहलाते, वेद हिरण्यगर्भ कह गाते।
 
सहस्रांशु, प्रद्योतन, कहि कहि, मुनिगन होत प्रसन्न मोदलहि।
अरुण सदृश सारथी मनोहर, हांकत हय साता चढ़ि रथ पर।
 
मंडल की महिमा अति न्यारी, तेज रूप केरी बलिहारी।
उच्चैश्रवा सदृश हय जोते, देखि पुरन्दर लज्जित होते।
 
मित्र, मरीचि, भानु, अरुण, भास्कर, सविता,
सूर्य, अर्क, खग, कलिहर, पूषा, रवि,
 
आदित्य, नाम लै, हिरण्यगर्भाय नमः कहिकै।
द्वादस नाम प्रेम सो गावैं, मस्तक बारह बार नवावै।
 
चार पदारथ सो जन पावै, दुख दारिद्र अघ पुंज नसावै।
नमस्कार को चमत्कार यह, विधि हरिहर कौ कृपासार यह।
 
सेवै भानु तुमहिं मन लाई, अष्टसिद्धि नवनिधि तेहिं पाई।
बारह नाम उच्चारन करते, सहस जनम के पातक टरते।
 
उपाख्यान जो करते तवजन, रिपु सों जमलहते सोतेहि छन।
छन सुत जुत परिवार बढ़तु है, प्रबलमोह को फंद कटतु है।
 
अर्क शीश को रक्षा करते, रवि ललाट पर नित्य बिहरते।
सूर्य नेत्र पर नित्य विराजत, कर्ण देश पर दिनकर छाजत।
 
भानु नासिका वास करहु नित, भास्कर करत सदा मुख कौ हित।
ओठ रहैं पर्जन्य हमारे, रसना बीच तीक्ष्ण बस प्यारे।
 
कंठ सुवर्ण रेत की शोभा, तिग्मतेजसः कांधे लोभा।
पूषा बाहु मित्र पीठहिं पर, त्वष्टा-वरुण रहम सुउष्णकर।
 
युगल हाथ पर रक्षा कारन, भानुमान उरसर्मं सुउदरचन।
बसत नाभि आदित्य मनोहर, कटि मंह हंस, रहत मन मुदभर।
 
जंघा गोपति, सविता बासा, गुप्त दिवाकर करत हुलासा।
विवस्वान पद की रखवारी, बाहर बसते नित तम हारी।
 
सहस्रांशु, सर्वांग सम्हारै, रक्षा कवच विचित्र विचारे।
अस जोजजन अपने न माहीं, भय जग बीज करहुं तेहि नाहीं।
 
दरिद्र कुष्ट तेहिं कबहुं न व्यापै, जोजन याको मन मंह जापै।
अंधकार जग का जो हरता, नव प्रकाश से आनन्द भरता।
 
ग्रह गन ग्रसि न मिटावत जाही, कोटि बार मैं प्रनवौं ताही।
मन्द सदृश सुतजग में जाके, धर्मराज सम अद्भुत बांके।
 
धन्य-धन्य तुम दिनमनि देवा, किया करत सुरमुनि नर सेवा।
भक्ति भावयुत पूर्ण नियम सों, दूर हटत सो भव के भ्रम सों।
 
परम धन्य सो नर तनधारी, हैं प्रसन्न जेहि पर तम हारी।
अरुण माघ महं सूर्य फाल्गुन, मध वेदांगनाम रवि उदय।
 
भानु उदय वैसाख गिनावै, ज्येष्ठ इन्द्र आषाढ़ रवि गावै।
यम भादों आश्विन हिमरेता, कातिक होत दिवाकर नेता।
अगहन भिन्न विष्णु हैं पूसहिं, पुरुष नाम रवि हैं मलमासहिं।
 
दोहा
 भानु चालीसा प्रेम युत, गावहिं जे नर नित्य।
सुख सम्पत्ति लहै विविध, होंहि सदा कृतकृत्य।।

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डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): ये लेख लोक मान्यताओं पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। 
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