जब ग्रह वक्री होते हैं तो सूर्य से ग्रह की दूरी बढ़ जाती है, और वह धरती के करीब होता है। स्वाभाविक है कि जो भी ग्रह पृथ्वी के जितना करीब होगा, वह व्यक्ति को उतना ही अधिक प्रभावित करेगा। इससे व्यक्ति की स्थितियां बदल नहीं जाती है या उसके जीवन में उथल-पुथल नहीं मच जाती है। होता यह है कि ग्रहों से उत्पन्न होने वाली उर्जा,अदृश्य ध्वनि तथा कंपन अस्थाई तौर पर व्यक्ति की मनोदशा बदल देते हैं।
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इस तरह वक्री ग्रह आपके जीवन को प्रभावित करते हैं
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ग्रह नक्षत्र
ग्रहों की गति तेज हो जाती है, इसलिए कुंडली में स्थित जिन भावों से उस ग्रह का संबंध होता है, उनके प्रभाव कई गुना तक बढ़ जाते है। उदाहरण के लिए बुध को बुद्धि का ग्रह माना जाता है। इसके वक्री होने से ग्रह की गति और जातक के मस्तिष्क का तालमेल गड़बड़ा जाता है, फलतः इंसान बेवजह कुतर्क करता है या जहां बोलना जरूरी हो वहां मौन हो जाता है।
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इस तरह वक्री ग्रह आपके जीवन को प्रभावित करते हैं
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venus planet
वक्री ग्रह कई बार समस्याओं को दूर करते और शुभ फल भी देते हैं। उदाहरण के लिए वक्री शुक्र प्रेम संबंधों में विलंब अथवा अपरंपरागत प्रेमसबंधं को सूचित करता है। शनि वक्री हो तो बोध के स्तर पर अकेलापन बढ़ाता है। किसी पर हावी होना नहीं चाहता। जातक खुद कार्यों में उलझता है फिर परेशान भी होता रहता है।
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मेष राशि
- फोटो : mars
मंगल अपनी वक्री चाल से क्रोध पर काबू रखने में सफल तो हो जाता है किंतु कुछ समय के लिए। बृहस्पति वक्री होते हैं तो आध्यात्मिकता की ओर रुझान बढ़ता है किंतु गुरु अपने स्वभाव के अनुसार अहं भाव नहीं छोडता। वह ज्ञान किसी और से स्वीकार करने में नहीं बल्कि स्वयं अध्ययन से प्राप्त करता है।
वक्री ग्रहों के बारे में बेहद भय और संशय देखा जाता रहा है। सचाई यह है कि ये ग्रह वक्री होने के कारण नहीं, बल्कि स्वयं क्रूर ग्रहों की चपेट में आकर अर्थात अपने कर्मों के अनुसार अच्छे बुरे परिणाम देते हैं, न कि वक्री या मार्गी होने से।