Shadashtak Yog : 18 मई को पापी ग्रह राहु राशि परिवर्तन करेंगे। राहु मीन राशि की अपनी यात्रा को विराम देते हुए शनि की राशि कुंभ में आ जाएंगे, जहां पर ये करीब 18 महीनों तक रहेंगे। राहु के कुंभ राशि में गोचर करने से मंगल के नीच राशि कर्क में मौजूद होंगे जिस कारण से षडाष्टक योग का निर्माण होगा। मंगल के नीच राशि में रहने से और राहु के गोचर करने से मंगल से राहु अष्टम भाव में रहेंगे और राहु से मंगल छठे भाव में रहेंगे। ज्योतिष में मंगल और राहु को शुभ ग्रह ग्रह नहीं माना जाता है। ऐसे में 18 मई को इन दोनों ग्रहों के योग से कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। षडाष्टक योग से देश-दुनिया में तनाव, युद्ध, उन्माद, प्राकृतिक आपदाएं, भूकंप और दो देशों के बीच तनाव चरम पर होने की संभावना हो सकती है। षडाष्टक योग से कुछ राशि के जातकों को परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।
क्या होता है षडाष्टक योग
वैदिक ज्योतिष शास्त्र के अनुसार जब दो ग्रह एक दूसरे से छठे और आठवें भाव में रहते हैं इस तरह का योग बनता है। इसके अलावा दो ग्रहों में 150 डिग्री का अंतर होने पर भी इस तरह के योग का निर्माण होता है। यह षडाष्टक योग से कई तरह चुनौतियों और परेशानियों का सामना करना पड़ता है। राहु और मंगल दोनों ही को पापी और उग्र ग्रह माना जाता है। ऐसे में दो उग्र ग्रहों से संयोग से यह योग अधिक शक्तिशाली बना रहा है। इस षडाष्टक योग से सामाजिक संबंधों, आर्थिक फैसलों और मानसिक शांति पर भी असर डालेगा।