ग्रहों में युवराज कहे जाने वाले चंद्रपुत्र बुध 31 मार्च की मध्य रात्रि 12 बजकर 40 मिनट पर कुंभ राशि की यात्रा समाप्त करके बृहस्पति की राशि मीन में प्रवेश कर चुके हैं। इस राशि में ये 16 अप्रैल की रात्रि 8 बजकर 54 मिनट तक गोचर करेंगे, उसके बाद मंगल की राशि मेष राशि में प्रवेश कर जायेंगे। मीन राशि में ये नीच राशिगत संज्ञक माने गए हैं। ये चंचल भ्रमणशील और मिलनसार ग्रह के रूप में जाने जाते हैं। स्वास्थ्य की दृष्टि से बुध जातक को चर्म रोग, पेट संबंधी विकार तथा सर्वाइकल के दर्द से संबंधित समस्याओं से अधिक परेशान कर सकते हैं।
इनके शुभ प्रभाव के परिणामस्वरुप जातक विद्वान, दार्शनिक, लेखक, कवि, शोधपरक कार्य, शल्य चिकित्सा, गणितज्ञ, ज्योतिष विज्ञान, शिक्षण कार्य, बैंकिंग के क्षेत्र, तथा कानून के क्षेत्र में अच्छी ख्याति प्राप्त करता है। मिथुन एवं कन्या राशि के स्वामी बुध, कन्या राशि में उच्चराशि तथा मीन राशि में नीचराशिगत संज्ञक माने गए हैं। इनके राशि परिवर्तन का अन्य सभी राशियों पर कैसा रहेगा इसका ज्योतिषीय विश्लेषण करते हैं।