ग्रहों में युवराज कहे जाने वाले चंद्रपुत्र बुध वृश्चिक राशि की यात्रा संपन्न करके 25 दिसंबर को दोपहर 3 बजकर 42 मिनट पर धनु राशि में प्रवेश करेंगे जहां ये 13 जनवरी 2020 तक विराजमान रहेंगे।
फलित ज्योतिष में बुध
फलित ज्योतिष में बुध बैंकिंग सेक्टर, बीमा, फाइनेंस करने वाली कंपनियों, आईटी, शिक्षण संस्थानों, वित्तीय संस्थानों,कॉमर्स, न्यायिक व्यवस्था, शल्य चिकित्सा, फार्मा आदि के कारक माने गए हैं। जिस जातक की जन्मकुंडली में बुध की स्थिति बलवान रहती है वह कुशल वक्ता और तर्कशास्त्र में पारंगत होता है। ऐसे व्यक्ति को समझ पाना कठिन रहता है। मिथुन एवं कन्या राशि के स्वामी बुध मीन राशि में नीचसंज्ञक माने गए हैं जबकि, कन्या राशि में इन्हें उच्च राशिगत संज्ञा प्राप्त है। स्वास्थ्य की दृष्टि से इनका प्रभाव कंधे एवं नाभि प्रवेश पर रहता है अतः जन्म कुंडली में यदि बुध पाप ग्रहों के मध्य हो या नीच राशि गत हो तो प्राणियों के शरीर के इन स्थानों पर कहीं न कहीं व्याधिजन्य परेशानियों का सामना करना पड़ता है।