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Digital Detox: सिर्फ 2 घंटे मोबाइल बंद करने की आदत दे सकती है दिमाग को नई ताकत, जानिए कैसे?

Wed, 22 Apr 2026 02:53 PM IST
Jyoti Mehra फीचर डेस्क, अमर उजाला

सार

Mental and Psychological Benefits: क्या केवल दो घंटे के लिए फोन, टीवी या बाकी डिजिटल उपकरणों से दूरी बनाने से हमारे दिमाग को ताकत मिलती है? आइए जानते हैं इस पर विज्ञान का क्या कहना है।
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कैसे करें दिमाग को रीसेट? - फोटो : AI
Benefits of Digital Detox: आज की तेज रफ्तार जिंदगी में हमारा दिमाग कभी सच में “ऑफ” नहीं होता। नोटिफिकेशन की आवाज, स्क्रीन की रोशनी और लगातार चलती बातचीत, ये सब मिलकर हमारे दिमाग को हर पल व्यस्त रखते हैं। इस तरह की जीवनशैली हमारे मानसिक स्वास्थ्य पर कई तरह के नकारात्मक प्रभाव भी डालता है। लेकिन सोचिए अगर सिर्फ कुछ समय के लिए आप इस शोर से दूरी बना लें, तो क्या आपका दिमाग खुद को ठीक कर सकता है? वैज्ञानिकों का जवाब है हां, और वो भी बेहद आसान तरीके से।

न्यूरोसाइंस के अनुसार पूरी तरह की शांति हमारे मस्तिष्क के लिए किसी मरहम से कम नहीं है। जब हम कुछ समय के लिए फोन, टीवी और बाकी डिजिटल उपकरणों से दूरी बना लेते हैं, तो दिमाग को आराम मिलने लगता है। यह आराम सिर्फ थकान दूर करने तक सीमित नहीं होता, बल्कि यह दिमाग के अंदर नई कोशिकाओं के निर्माण को भी बढ़ावा देता है।
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मजबूत होती है याददाश्त - फोटो : Adobe stock
मजबूत होती है याददाश्त 
दरअसल हमारे मस्तिष्क में एक खास हिस्सा होता है, हिप्पोकैंपस। यही वह क्षेत्र है, जहां नई ब्रेन सेल्स बनती हैं और याददाश्त से जुड़े काम होते हैं। जब हम लगातार शोर और डिजिटल उत्तेजना में रहते हैं, तो यह प्रक्रिया प्रभावित होती है। लेकिन जैसे ही हम शांति में समय बिताते हैं, दिमाग अपनी ऊर्जा को इस हिस्से की ओर केंद्रित कर देता है, जिससे नई कोशिकाएं बनने लगती हैं और पुरानी यादें मजबूत होती हैं।
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याददाश्त और एकाग्रता में सुधार - फोटो : Freepik.com
याददाश्त और एकाग्रता में सुधार 
एक अध्ययन में यह पाया गया कि रोजाना कुछ समय की पूर्ण शांति दिमाग के काम करने के तरीके को बेहतर बना सकती है। इस दौरान मस्तिष्क खुद को “रीसेट” करता है, यानी वह अपने भीतर हो रहे नुकसान की मरम्मत करता है और नई कोशिकाओं को स्थिर बनाता है। इस प्रक्रिया को न्यूरोजेनेसिस कहा जाता है, जो हमारी याददाश्त, एकाग्रता और भावनात्मक संतुलन को बेहतर बनाती है।

इसके विपरीत जब हम लगातार बैकग्राउंड म्यूजिक या शोर में रहते हैं, तो दिमाग को सिर्फ अस्थायी उत्तेजना मिलती है, असली आराम नहीं। यही वजह है कि लंबे समय तक मानसिक थकान बनी रहती है। वहीं शांति दिमाग को गहराई से ठीक करने का काम करती है, मानो यह एक नेचुरल “रीचार्ज बटन” हो।
 

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दिनचर्या का हिस्सा - फोटो : Adobe Stock
दिनचर्या का हिस्सा
इस आदत को अपनाना भी बेहद आसान है। रोजाना कुछ समय के लिए अपने सभी गैजेट्स बंद कर दें और किसी शांत जगह पर अकेले बैठें। शुरुआत में यह थोड़ा अजीब लग सकता है, लेकिन धीरे-धीरे दिमाग इस सुकून को पसंद करने लगेगा।
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दिनचर्या का हिस्सा - फोटो : Adobe Stock
विशेषज्ञों का मानना है कि यह छोटा-सा बदलाव लंबे समय में बड़ा असर डाल सकता है। शांति सिर्फ आराम का नाम नहीं, बल्कि यह दिमाग की गहरी देखभाल है। अगर हम इसे अपनी दिनचर्या का हिस्सा बना लें, तो हमारा दिमाग न सिर्फ ज्यादा तेज और मजबूत बनेगा, बल्कि हम खुद को मानसिक रूप से ज्यादा संतुलित और खुश भी महसूस करेंगे।

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