वैदिक ज्योतिष में मंगल ग्रह
ज्योतिषशास्त्र के अनुसार सभी नौ ग्रहों का अपना स्वभाव और अलग-अलग कारक तत्व होते हैं। वैदिक ज्योतिष में मंगल ग्रह को सभी ग्रहों का सेनापति का दर्जा मिला हुआ है। इसके अलावा मंगल ग्रह को पृथ्वी पुत्र कहा जाता है। जिन जातकों की कुंडली में मंगल ग्रह शुभ भाव में होते हैं ऐसे लोग काफी बुद्धिमान, प्रतापी और ऊर्जावान होते हैं। ज्योतिष में मंगल को मेष और वृश्चिक राशि का स्वामी माना जाता है। मेष और वृश्चिक राशि के स्वामी मंगल ग्रह कर्क राशि में ही नीच के और मकर राशि में उच्च राशि के माने जाते हैं।
02 जून को मंगल का राशि परिवर्तन
स्वभाव से उग्र ग्रह माने जाने वाले और पृथ्वी पुत्र मंगल 2 जून को सुबह 6 बजकर 49 मिनट पर मिथुन राशि की यात्रा समाप्त करके कर्क राशि में प्रवेश करने जा रहे हैं। कर्क राशि मंगल ग्रह की नीच राशि मानी जाती है। मंगलदेव कर्क राशि में 20 जुलाई तक गोचर करेंगे फिर उसके बाद सिंह राशि में प्रवेश कर जाएंगे। सभी ग्रहों में मंगल अकेले ऐसे ग्रह हैं जो नीचराशि पर गोचर करते समय कई बार नीच भंग योग का लाभ प्राप्त करते हैं क्योंकि, इस राशि के स्वामी चंद्रमा जैसे-जैसे केंद्र और त्रिकोण में गोचर करते हैं इनका नीचराशि योग भंग हो जाता है। अतः इनसे संबंधित अच्छे और बुरे दोनों तरह के फल जातक को प्राप्त होते हैं। आइए जानते हैं मंगल ग्रह का यह गोचर सभी राशियों पर कैसा प्रभाव रहेगा।