महापुरुष योग
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कब बनता है भद्र और मालव्य राजयोग
वैदिक ज्योतिष के अनुसार, भद्र राजयोग बुध ग्रह से जुड़ा होता है और इसे पंच महापुरुष योगों में से एक माना जाता है। यह योग तब बनता है जब बुध ग्रह कुंडली में लग्न या चंद्रमा से देखे जाने वाले केंद्र स्थानों, यानी पहले, चौथे, सातवें या दसवें भाव में स्थित हो और वह मिथुन या कन्या राशि में हो। ऐसी स्थिति में जातक की कुंडली में भद्र राजयोग बनता है, जो बुद्धिमत्ता, वाणी की तीव्रता और व्यावसायिक सफलता दिलाने वाला होता है।
वहीं मालव्य राजयोग शुक्र ग्रह से संबंधित होता है। यह योग तब बनता है जब शुक्र कुंडली में लग्न या चंद्रमा से पहले, चौथे, सातवें या दसवें भाव में स्थित हो और वह वृषभ, तुला या मीन राशि में हो। यह योग जातक को ऐश्वर्य, सुंदरता, भौतिक सुख-सुविधा और सामाजिक प्रतिष्ठा प्रदान करता है। लेकिन अगर शुक्र पर सूर्य या गुरु की दृष्टि हो, तो इस योग का प्रभाव कम हो सकता है, क्योंकि शुक्र का इन ग्रहों के साथ शत्रु भाव माना गया है।