Makar Sankranti Rashi Bhavishya: ज्योतिष शास्त्र के अनुसार सूर्य का गोचर बारह राशियों को शुभाशुभ फल प्रदान करता है। सूर्य के अतिरिक्त अन्य ग्रहों का गोचर एवं जन्म-पत्री में चलने वाली महादशा अंतर्दशा ज्योतिषीय फलादेश में अंतिम निर्णय प्रदान करती है।
Makar Sankranti Impact on Zodiac Signs: मकर संक्रांति के दिन सूर्य के मकर राशि में प्रवेश करते ही खरमास समाप्त होता है। इस बार मकर संक्रांति 14 जनवरी को मनाई जाएगी और पहला अमृत स्नान भी इसी दिन किया जाएगा। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार सूर्य का गोचर बारह राशियों को शुभाशुभ फल प्रदान करता है। सूर्य के अतिरिक्त अन्य ग्रहों का गोचर एवं जन्म-पत्री में चलने वाली महादशा अंतर्दशा ज्योतिषीय फलादेश में अंतिम निर्णय प्रदान करती है।
मेष राशि
गोचर से दशम भाव में सूर्य के आने पर धन, स्वास्थ्य, मित्र आदि का सुख प्राप्त होता है। राज्याधिकारियों और प्रतिष्ठित लोगों से मित्रता बढ़ती है। पदोन्नति का अवसर मिलता है। मान, गौरव, प्रताप बढ़ता है।
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वृष राशि
गोचर से नवम स्थान में सूर्य के आने पर आय की कमी, रोग एवं अशांति उत्पन्न हो सकती है। झूठा आरोप, बिना कारण धन और पुण्य की हानि के साथ ही बड़ों तथा मित्रों एवं भाइयों से विरोध रहता है।
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मिथुन राशि
गोचर से अष्टम स्थान में सूर्य के आने पर जातक को पूर्व में किए गए बुरे कर्मों का फल मिलता है। शत्रुओं से झगड़ा होता है, शरीर में पीड़ा रहती है, अधिक खर्च होता है और अपमान का विशेष भय रहता है।
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कर्क राशि
गोचर से सातवें स्थान में सूर्य के आने से दांपत्य जीवन में वैमनस्य की उत्पत्ति होती है और कष्टकारी यात्राएं करनी पड़ती हैं। उदर पीड़ा, सिर दर्द आदि से कष्ट हो सकता है तथा मानहानि भी संभव है।
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सिंह राशि
गोचर से छठे स्थान में सूर्य के आने से कार्य सिद्धि और सुख की प्राप्ति होती है, अन्न-वस्त्र आदि का लाभ होता है। शत्रुओं पर विजय प्राप्त होती है, शोक-मोह आदि का नाश होकर चित्त और शरीर स्वस्थ रहते हैं।
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कन्या राशि
गोचर से पंचम भाव में सूर्य के आने से मानसिक भ्रम उत्पन्न होता है, बुद्धि भ्रमित होने लगती है। ऐसे में जातक को निर्णय गलत होने के कारण अनेक प्रकार के कष्ट एवं पीड़ा सहनी पड़ती है।
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तुला राशि
गोचर में चतुर्थ स्थान में सूर्य के आने से मानसिक और शारीरिक व्यथा रहती है। घरेलू झगड़ों के कारण सुखों में कमी आ जाती है, जमीन-जायदाद संबंधी अनेक प्रकार की समस्याएं उत्पन्न हो जाती हैं।
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वृश्चिक राशि
गोचर से तृतीय स्थान में सूर्य के आने से रोगों से मुक्ति, सुख-चैन, शुभ समाचार मिलते हैं। शत्रुओं की पराजय होती है तथा व्यक्ति लक्ष्मी और मान-प्रतिष्ठा प्राप्त करता है। प्रायः उच्च पद की प्राप्ति होती है।
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धनु राशि
गोचर से द्वितीय स्थान में सूर्य के आने से मित्रों और संबंधियों से झगड़ा होता है और व्यक्ति का पूरा महीना सुख रहित व्यतीत होता है। व्यापार और धन-संपत्ति की हानि का भय रहता है।
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मकर राशि
गोचर से प्रथम भाव में सूर्य के आने से धन का नाश होता है। मान-सम्मान में कमी आती है। प्रत्येक कार्य विलंब से संपन्न होता है। संबंधियों, मित्रों और सज्जनों से झगड़ा होने से मानसिक व्यथा रहती है।
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कुंभ राशि
गोचर से द्वादश भाव में सूर्य के आने से दूर देश का भ्रमण होता है। कार्य एवं पद की हानि होती है। व्यय अधिक रहता है। कई प्रकार की कठिनाइयां झेलनी पड़ती हैं। मित्रों का व्यवहार भी शत्रुतापूर्ण हो जाता है।
मीन राशि
गोचर से एकादश भाव में सूर्य के आने से हर प्रकार का लाभ, धन प्राप्ति, नवीन पद और बड़ों के अनुग्रह की प्राप्ति होती है। स्वास्थ्य अच्छा रहता है और आध्यात्मिक एवं मांगलिक कार्य होते रहते हैं।
डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।