केतु ग्रह की विशेषताएं
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केतु ग्रह की विशेषताएं
केतु ज्योतिष शास्त्र में एक विशेष ग्रह माना जाता है और इसे छाया ग्रह के रूप में जाना जाता है। केतु की दो भुजाएं होती हैं, जिनमें से एक हाथ में गदा और दूसरे में वरमुद्रा धारण की जाती है। सिर पर मुकुट और शरीर पर काला वस्त्र धारण करने के कारण इसे आध्यात्मिक और रहस्यमय शक्ति का प्रतीक माना जाता है। ज्योतिष में कहा जाता है कि केतु व्यक्ति की मानसिक शक्तियों और आध्यात्मिक उन्नति से जुड़ा हुआ है। यह ग्रह भले ही छाया ग्रह है, लेकिन इसका प्रभाव व्यक्ति के जीवन पर काफी गहरा होता है।
कुछ विद्वानों के अनुसार, केतु की तुलना राहु से की जाए तो यह अपेक्षाकृत सौम्य और नियंत्रित ग्रह है। यदि किसी व्यक्ति की कुंडली में केतु शुभ स्थान पर स्थित होता है तो यह व्यक्ति को यश, मान-सम्मान और सफलता के शिखर तक पहुंचा सकता है। केतु की महादशा सात वर्षों की होती है, और इस अवधि में व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक या नकारात्मक दोनों प्रकार के अनुभव आ सकते हैं। वहीं, अगर केतु अशुभ स्थान पर हो तो यह अनिष्टकारी हो जाता है। ऐसे में केतु का प्रभाव रोगों, मानसिक परेशानियों और जीवन में अवरोधों के रूप में दिखाई दे सकता है। प्रतिकूल केतु के प्रभाव से व्यक्ति को दाद, खाज, कुष्ठ जैसी त्वचा संबंधी बीमारियाँ भी हो सकती हैं और जीवन में निरंतर बाधाएं आ सकती हैं।