वैदिक ज्योतिष में केतु को भी राहु की तरह ही एक मायावी ग्रह माना गया है जिसे किसी भी राशि का स्वामित्व प्राप्त नहीं है। विद्वानों के मत के अनुसार केतु मंगल समान फल देने वाला कहा गया है। इसका अर्थ यह है कि अगर किसी जातक की कुंडली में मंगल अच्छा है तो जाहिर सी बात है की उसे केतु के अच्छे परिणाम मिलते हैं। केतु ग्रह 30 अक्टूबर 2023 को तुला राशि से निकलकर कन्या राशि में प्रवेश करेंगे तो सभी 12 राशियों पर इसका प्रभाव होगा। आइये जानते है कि आपकी राशि पर इसका क्या प्रभाव होगा ?
मेष राशि- इस राशि के जातकों के लिए केतु का गोचर छठे भाव से होने जा रहा है। इस भाव से रोग, ऋण और शत्रु का विचार किया जाता है। इस भाव में विराजमान केतु की दृष्टि आपके दशम,द्वादश और धन भाव पर होगी। केतु के गोचर के अब वैवाहिक जीवन में माधुर्य लौटकर आने वाला है। पत्नी की सेहत भी अब बढ़िया होगी। शत्रुओं पर विजय प्राप्त करने के योग है। नौकरी में कोई बड़ी उन्नति और तरक्की मिल सकती है। केतु की कृपा से विदेश जाने की इच्छा रखने वाले जातक अच्छी खबर प्राप्त करेंगे। इस समय कार्य स्थल पर आपको थोड़ा परेशान किया जा सकता है लेकिन आप विजय प्राप्त करने में सफल होंगे। केतु की कृपा से आपको परिवार के द्वारा धन प्राप्ति भी हो सकती है और आपका कोई नया काम भी शुरू हो सकता है।
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वृष राशि - इस राशि के जातकों के लिए केतु का गोचर पंचम भाव में होगा। पंचम भाव से प्रेम,संतान,शिक्षा का विचार किया जाता है। इस भाव में विराजमान केतु की दृष्टि आपके नवम भाव,एकादश भाव और लग्न भाव पर होगी। पंचम में केतु के गोचर के प्रभाव से आपको पढ़ाई में बाधा महसूस होगी। आपको अपने प्रेमी की ओर से धोखा भी प्राप्त हो सकता है। इस समय किसी से दिल नहीं लगाए तो ही बढ़िया है। व्यापारी वर्ग को केतु का गोचर फायदा देगा और आपका नया काम शुरू हो जाएगा। इस गोचर के प्रभाव से मित्रों से कष्ट सम्भव है। नौकरी कर रहे जातक नौकरी न बदले बल्कि वर्तमान नौकरी में ही अच्छा काम करें।
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मिथुन राशि - इस राशि के जातकों के लिए केतु का गोचर चौथे भाव से होने जा रहा है। इस भाव से माता,संपत्ति,भवन और मानसिक शक्ति देखी जाती है। इस भाव में विराजमान होकर केतु अपनी दृष्टि से अष्टम,दशम और द्वादश भाव को देखेंगे। चौथे भाव में केतु का गोचर जातक को चंचल और उत्साहविहीन करता है। केतु के इस गोचर से आप मां की सेहत को लेकर थोड़े परेशान होंगे। आपके जीवन में उत्साह की कमी आपको दिखाई देगी। इस गोचरकाल में आपको मानसिक संताप प्राप्त हो सकता है। परिवार से उम्मीद के मुताबिक मदद नहीं प्राप्त होगी। इस समय वाहन सावधानी से चलाए। कार्यस्थल पर आपके खिलाफ साजिश हो सकती है। जो जातक विदेश जाने की सोच रहे है उनका सपना पूरा होगा।
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कर्क राशि - इस राशि के जातकों के लिए केतु का गोचर अब तीसरे भाव में होने जा रहा है। इस भाव से संवाद, लेखन, भाई, साहस और छोटी यात्रा का विचार किया जाता है। केतु इस भाव में बैठकर आपके सप्तम, नवम और एकादश भाव को देखने वाले है। केतु के इस गोचर के कारण आपके भाइयों को बढ़िया सफलता मिलेगी। धन और सम्पत्ति को लेकर चल रहा विवाद अब खत्म होगा। इस गोचर काल के दौरान की गई यात्रा में सफल होने के योग बनेंगे। आप किसी बड़ी धार्मिक यात्रा में शामिल हो सकते हैं। दार्शनिक विचारों की जीवन में प्रधानता होगी। केतु की कृपा से मित्रों का सहयोग प्राप्त होगा और आपका कोई नया काम भी शुरू होगा। व्यापारी वर्ग को केतु के इस गोचर से अच्छा मुनाफा होगा।
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सिंह राशि - इस राशि के जातकों के लिए केतु का गोचर दूसरे भाव से होने जा रहा है। इस भाव से वाणी,संचित धन और परिवार का सुख देखा जाता है। केतु इस भाव में विराजमान होकर आपके छठे,आठवें और दशम भाव को देखेंगे। इस गोचर काल में आपकी वाणी में कटुता आ सकती है। इस समय परिवार में किसी कलह का जन्म हो सकता है। आपको इस समय किसी कोर्ट केस में पराजय का सामना भी करना पड़ सकता है। कोशिश करें कि वाहन सावधानी से चलाएं। गुप्त शत्रु सामने आकर नुकसान पहुंचाने की कोशिश करेंगे लेकिन विजय आपको ही प्राप्त होगी। इस गोचर काल में कार्यस्थल पर अतिरिक्त जिम्मेदारी दी जा सकती है।
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कन्या राशि - इस राशि के जातकों के लिए केतु का गोचर लग्न में ही होने जा रहा है। इस भाव से जातक के व्यक्तित्व का ज्ञान होता है। लग्न में विराजमान केतु की दृष्टि आपके पंचम, सप्तम और नवम भाव पर होगी। लग्न भाव में केतु का गोचर जातक को डरपोक बना देता है। जातक व्यर्थ लोगों की बातों में आकर धन खर्च करता है। केतु के इस गोचर के कारण बड़ा प्रोजेक्ट आपके हाथ से निकल सकता है। इस समय आपको चुनौतियों से जूझना पड़ सकता है। प्रेम प्रसंग में आपको धोखा मिलेगा वहीं वैवाहिक जीवन में भी तनाव की आशंका बनी रहने वाली है। इस समय किसी की बातों में आकर कोई नया काम शुरू नहीं करे। केतु के इस गोचर के दौरान धार्मिक यात्रा का योग बनता हुआ दिखाई दे रहा है।
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तुला राशि - इस राशि के जातकों के लिए केतु का गोचर द्वादश भाव में होने जा रहा है। इस भाव से व्यय,एकांत,कारावास,विदेश और मोक्ष का विचार किया जाता है। इस भाव में विराजमान होकर केतु चौथे,छठे और आठवें पर दृष्टि डालेंगे। बारहवें भाव में केतु का गोचर अच्छा फल देने वाला कहा गया है। इस समय केतु की कृपा से आप उदार होंगे और गरीबों की भलाई में आपका धन खर्च होगा। इस गोचर काल में विदेशी संबंधों से मुनाफा दिखाई पड़ रहा है। इस समय गुप्त विद्या और तंत्र मंत्र में रूचि और बढ़ जायेगी। जो पुरानी वस्तुओं को बेचने का काम करते है उन्हें बढ़िया मुनाफा प्राप्त होगा। नौकरी के काम से बड़ी यात्राएं होगी जो सफल रहेगी।
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वृश्चिक राशि - इस राशि के जातकों के लिए केतु का गोचर एकादश भाव में होने जा रहा है। इस भाव से मित्रों और धन प्राप्ति का विचार किया जाता है। इस भाव में विराजमान होकर केतु की दृष्टि आपके तीसरें, पंचम और सप्तम भाव पर होगी। एकादश भाव में केतु का गोचर लाभदायक और प्रसिद्धि देने वाला कहा गया है। केतु के इस गोचर के कारण लम्बे समय से अटके काम फिर गति पकड़ सकते है। केतु की कृपा से आपको किसी बड़ी नौकरी का ऑफर आ सकता है या फिर पदोन्नति भी हो सकती है। इस समय विद्यार्थी वर्ग को इच्छित सफलता प्राप्त होगी। केतु की कृपा से आपकी वाणी प्रभावी होगी। कार्य स्थल पर आप केतु की कृपा से बड़े लक्ष्यों को सम्पादित करेंगे।
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धनु राशि - इस राशि के जातकों के लिए केतु का गोचर दशम भाव में होने जा रहा है। इस भाव में व्यक्ति के कार्य स्थल का बोध किया जाता है। इस भाव में विराजमान केतु की दृष्टि आपके दूसरे,चौथे और छठे भाव पर जा रही है। केतु के इस गोचर के कारण राजनीति से जुड़े जातकों को बेहतर मौके मिलने वाले है। इस समय आपको कार्य स्थल पर थोड़ा सावधान रहना होगा। ऐसा हो सकता है कि आपको कोई बड़ी जिम्मेदारी दी जाए। आपको यह सलाह दी जाती है कि बिना सोचे समझे किसी को धन उधार नहीं दे। अपनी मां की सेहत को लेकर इस समय आप परेशान रह सकते हैं।
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मकर राशि - इस राशि के जातकों के लिए केतु का गोचर नवम भाव में होने जा रहा है। इस भाव से भाग्य, धर्म और गुरु का ज्ञान किया जाता है। नवम भाव में विराजमान केतु की दृष्टि आपके लग्न भाव,तीसरे भाव और पंचम भाव पर होगी। इस भाव में विराजमान केतु जातक को धार्मिक प्रवत्ति देने वाले होते हैं। केतु के प्रभाव से आपको धार्मिक यात्रा पर जाने का मौका मिलेगा और आपके गुरुओं के आशीर्वाद से सफलता मिलेगी। इस समय आपका साहस बढ़ा हुआ रहने वाला है और यात्राओं से आपको लाभ होगा। भाइयों का सहयोग प्राप्त होगा और आपका मन प्रसन्न रहेगा। केतु के इस गोचर के दौरान आपको अपने स्वास्थ्य का ध्यान रखना होगा।
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कुंभ राशि - इस राशि के जातकों के लिए केतु का गोचर अष्टम भाव से होने जा रहा है। इस भाव से दुर्घटना और आकस्मिक नुकसान का बोध होता है। इस भाव में विराजमान केतु की दृष्टि द्वादश,द्वितीय और चतुर्थ भाव पर होगी। अष्टम में केतु का गोचर जातक को स्त्री विरोधी बना देता है। जातक की बुद्धि उसके मित्रों के द्वारा संचालित होने लगती है। इस भाव में केतु के गोचर के कारण आप अपनी पत्नी और ससुराल पक्ष से विवाद कर सकते है। अचानक से धन की कोई बड़ी हानि संभव है। इस समय आपको कोशिश करनी होगी कि कुटुंब में आपके कारण कोई पारिवारिक कलह उत्पन्न नहीं हो। गुप्त साधना और ज्योतिष विद्या में रत जातकों को सफलता मिलेगी। इस समय आपकी वाणी के प्रभाव से आप किसी बड़े कार्य को सिद्ध करके दिखाएंगे।
मीन राशि - इस राशि के जातकों के लिए केतु का गोचर सप्तम भाव से होने जा रहा है। इस भाव से जातक के वैवाहिक जीवन और साझेदारी में मुनाफे का विचार किया जाता है। सप्तम भाव में विराजमान केतु की दृष्टि इस समय आपके एकादश भाव, लग्न भाव और तीसरे भाव पर जा रही है। केतु के इस गोचर के दौरान आपके वैवाहिक जीवन में कुछ तनाव की आशंका नज़र आ रही है। इस समय आपको जीवनसाथी की भावना को समझकर काम करना होगा। इस समय जो अपना नया काम शुरू करना चाह रहे है उन्हें परिवार से मदद मिल सकती है। केतु के इस गोचर काल में आपके परिवार में आपके माध्यम से किसी धार्मिक आयोजन को संपन्न करवाया जा सकता है।