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Ketu Dosh Kam Karne Ke Upay: क्या आपकी कुंडली में केतु दोष? दुष्प्रभाव कम करने के लिए करें ये उपाय

Sun, 29 Mar 2026 05:09 PM IST
Shweta Singh ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला

सार

कुंडली में अगर राहु-केतु की स्थिति अनुकूल है तो आपको लाभ भी मिल सकता है। लेकिन अगर यह दोनों ग्रह प्रतिकूल स्थिति में है तो आपको इसके दुष्प्रभाव को कम करने के लिए कुछ विशेष उपाय करने चाहिए।  
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केतु दोष के उपाय - फोटो : amar ujala
Ketu Dosh: अक्सर देखा गया है कि अगर कुंडली में राहु-केतु का दोष है तो यह शुभ नहीं माना जाता है। कुंडली में अगर राहु-केतु की स्थिति अनुकूल है तो आपको लाभ भी मिल सकता है। लेकिन अगर यह दोनों ग्रह प्रतिकूल स्थिति में है तो आपको इसके दुष्प्रभाव को कम करने के लिए कुछ विशेष उपाय करने चाहिए।  यहां हम केतु के दुष्प्रभाव को कम करने के उपाय के बारे में जानकारी देंगे। जैसा कि आप जानते हैं, केतु ग्रह को छाया ग्रह भी कहा जाता है। यदि किसी जातक की कुंडली में केतु दोष है तो समस्या कड़ी हो सकती है। इसीलिए केतु के दुष्प्रभावों को कम करने के लिए कुछ विशेष उपाय करने की आवश्यकता होती है। आइए जानते हैं क्या हैं वो विशेष उपाय। 
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केतु को माघ,मूल और अश्विनी नक्षत्र का स्वामी कहा जाता है। - फोटो : adobe stock
केतु क्या है 
ज्योतिष शास्त्र में केतु को नवग्रहों में से एक ग्रह माना जाता है। केतु को माघ,मूल और अश्विनी नक्षत्र का स्वामी कहा जाता है। ज्योतिषशास्त्र के अनुसार केतु का कोई सिर नहीं होता। इसका सिर्फ धड़ होता है, इसलिए यह दृष्टि-रहित होता है, लेकिन अत्यंत प्रभावशाली माना जाता है। यह व्यक्ति की आध्यात्मिक ऊर्जा, पूर्वजन्म के कर्म, और गूढ़ ज्ञान से जुड़ा होता है।
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केतु के शुभ और अशुभ प्रभाव - फोटो : adobe stock
केतु के शुभ और अशुभ प्रभाव
जब केतु ग्रह शुभ स्थिति में होता है तब वह जीवन में वैराग्य, ध्यान, मोक्ष और आध्यात्मिक सिद्धि देता है। जिनकी कुंडली में केतु शुभ होता है वे लोग बहुत जल्दी आध्यात्मिक मार्ग पर अग्रसर होते हैं और गूढ़ विषयों में गहरी रुचि रखते हैं। वहीं जब केतु की स्थिति अशुभ होती है तब वह भ्रम, भय, दुर्घटनाएं, मानसिक तनाव, त्वचा रोग, अस्थिरता और आत्मविश्वास की कमी देता है। यह जातक को जीवन की मुख्यधारा से भी काट सकता है।
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केतु दोष के दुष्प्रभाव को कम करने के लिए रोजाना 108 बार "ॐ केतवे नमः" मंत्र का जाप करें। - फोटो : amar ujala
केतु के दुष्प्रभाव से बचने के उपाय 
  • केतु दोष के दुष्प्रभाव को कम करने के लिए रोजाना 108 बार "ॐ केतवे नमः" मंत्र का जाप करें। इससे मन को शांति मिलती है और नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है।
  • केतु के अशुभ प्रभाव को कम करने के लिए किसी काले कुत्ते को रोटी खिलाई जा सकती है। ऐसा माना जाता है कि यदि यह उपाय किया जाए तो व्यक्ति को तुरंत शांति प्राप्त होती है।
  • केतु दोष को कम करने के लिए शनिवार और मंगलवार के दिन काले तिल और गुड़ का दान करना लाभकारी होता है।
  • केतु के प्रभाव से सकारात्मक परिणाम प्राप्त करने के लिए अपने इष्टदेव की पूजा करें।
  • यदि आपको अपने इष्टदेव के बारे में जानकारी नहीं है तो आप काल भैरव, दुर्गा माता अथवा विघ्नहर्ता श्री गणेश की पूजा कर सकते हैं।
  • जो लोग केतु के कारण अशांति का सामना कर रहे हैं उन्हें काले और भूरे रंग के वस्त्र न पहनने की सलाह दी जाती है। विशेष रूप से शनिवार और मंगलवार के दिन ऐसे वस्त्र बिल्कुल भी नहीं पहनने चाहिए।
  • सोमवार के दिन रुद्राभिषेक करने से केतु जनित अशांति को दूर करने में सहायता मिलती है।
  • केतु के शुभ फल प्राप्त करने के लिए आप  लहसुनिया रत्न धारण कर सकते हैं। इसे किसी ज्योतिषी के मार्गदर्शन में ही धारण करना अधिक श्रेयस्कर होता है।
  • आप अपने घर के पूजा स्थल में 'केतु यंत्र' स्थापित कर सकते हैं। शनिवार और मंगलवार के दिन बाल, नाखून आदि नहीं काटने चाहिए।

 
 
डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता और संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। 

 

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