करवा चौथ का महत्व
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करवा चौथ का महत्व
करवा चौथ सिर्फ एक व्रत नहीं, बल्कि एक आध्यात्मिक और भावनात्मक बंधन है जो पति-पत्नी के प्रेम, विश्वास, और समर्पण को दर्शाता है। इस दिन महिलाएं सूर्योदय से लेकर चंद्रमा के दर्शन तक निर्जला व्रत रखती हैं। यह त्यौहार नारी शक्ति, त्याग, और परिवार की खुशहाली का प्रतीक है। पुराणों में वर्णित है कि माता पार्वती ने भी कठोर तपस्या करके भगवान शिव को पति के रूप में प्राप्त किया। सावित्री और सत्यवान की कथा इसका सबसे बड़ा उदाहरण है। सावित्री ने अपने अटूट व्रत और भक्ति से स्वयं यमराज को पराजित कर दिया और अपने पति को जीवनदान दिलाया।
इन प्रसंगों से स्पष्ट है कि स्त्री का संकल्प लौकिक सीमाओं को लांघकर अलौकिक तक को प्रभावित कर सकता है। करवा चौथ इस दर्शन का उत्सव है। उपवास, पूजा और कथा के माध्यम से स्त्री अपने पति के जीवन को ईश्वर की शरण में रखती है। यह व्रत यह विश्वास स्थापित करता है कि स्त्री का त्याग और भक्ति व्यक्तिगत न होकर ब्रह्मांडीय ऊर्जा से जुड़ा होता है, और उसका संकल्प सृष्टि के नियमों तक को परिवर्तित कर सकता है।
वैदिक विभूषण ज्योतिषाचार्य पं. मनोज कुमार द्विवेदी