कुंडली के तीसरे ,सातवें और ग्यारहवें भाव को काम त्रिकोण कहा जाता है।
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काम त्रिकोण क्या होता है?
ज्योतिष शास्त्र में कुंडली के तीसरे ,सातवें और ग्यारहवें भाव को काम त्रिकोण कहा जाता है। ये तीनों भाव मिलकर "काम" यानी इच्छाओं और प्रयासों का प्रतिनिधित्व करते हैं। इसमें तीसरा भाव – परिश्रम, साहस, संचार, छोटी यात्राओं का होता है, सातवां भाव – विवाह, साझेदारी, जीवनसाथी, व्यापार का होता है और ग्यारहवां भाव – लाभ, आकांक्षाएं, नेटवर्क, सफलता का कारक होता है। जब कोई शुभ ग्रह (जैसे गुरु, शुक्र, मंगल आदि) इन तीन भावों में स्थित होता है या इनसे किसी न किसी तरह जुड़ता है, तो काम त्रिकोण योग का निर्माण होता है।