देवगुरु बृहस्पति 8 अक्टूबर 2026 को शाम 7:03 बजे अश्लेषा नक्षत्र के चौथे पद में प्रवेश करेंगे। इस समय गुरु कर्क राशि में गोचर कर रहे हैं, जहां उन्हें उच्च का माना जाता है। अश्लेषा का चौथा पद मीन नवांश से संबंधित है और इसके स्वामी भी बृहस्पति ही हैं। ऐसे में गुरु की स्थिति और प्रभाव दोनों मजबूत माने जा रहे हैं। यह चरण ज्ञान, शिक्षा, विवेक, धर्म और सही निर्णय क्षमता को बढ़ाने वाला माना जा सकता है। अश्लेषा नक्षत्र गहराई, रणनीति, शोध और परिस्थितियों को समझने की क्षमता से जुड़ा है। गुरु 31 अक्टूबर तक इस पद में रहेंगे। इसके बाद मघा नक्षत्र के प्रथम पद में प्रवेश करेंगे। आइए जानते हैं किन राशियों के लिए यह समय लाभकारी माना जा रहा है।