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पहलगाम आतंकी हमला और भारत-पाक युद्ध: खप्पर योग से बन रहे हैं युद्ध जैसे हालात, जानें क्या कहते हैं ज्योतिषी

Mon, 28 Apr 2025 11:44 AM IST
मेघा कुमारी शैली प्रकाश, ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला

सार

चैत्र मास से ज्येष्ठ मास के बीच 5 शनिवार, 5 रविवार और 5 मंगलवार होने से खप्पर योग बनता है जो कि अशुभ माना गया है। इसके चलते 15 मार्च से लेकर 11 जून तक भारत के लिए विनाशकारी समय रहेगा। इसका सबसे ज्यादा नुकसान पाकिस्तान को उठाना पड़ेगा। 
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29 मार्च को शनि ने कुंभ से निकलकर मेष में प्रवेश किया है। इसके बाद 14 मई को बृहस्पति वृषभ से निकलकर मिथुन में और 18 मई को राहु मीन से निकलकर कुंभ में और केतु कन्या से निकलकर सिंह में गोचर करने वाले हैं। - फोटो : adobe stock
India Pakistan War Predition: वर्तमान में इस वर्ष 2025 में 4 बड़े ग्रहों का राशि परिवर्तन महत्वपूर्ण माना जा रहा है। 29 मार्च को शनि ने कुंभ से निकलकर मेष में प्रवेश किया है। इसके बाद 14 मई को बृहस्पति वृषभ से निकलकर मिथुन में और 18 मई को राहु मीन से निकलकर कुंभ में और केतु कन्या से निकलकर सिंह में गोचर करने वाले हैं। बृहस्पति ग्रह मिथुन में गोचर करते ही अतिचारी गति से चलेंगे और शनि के मकर, कुंभ के बाद मीन में गोचर से देश-दुनिया में बड़े पैमाने पर परिवर्तन हो चुका है। इसी बीच वायरल हो रही भविष्यवाणियां क्या कहती हैं भारत पाकिस्तान के संबंधों को लेकर, जानिए विस्तार से।
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चैत्र मास से ज्येष्ठ मास के बीच 5 शनिवार, 5 रविवार और 5 मंगलवार होने से खप्पर योग बनता है जो कि अशुभ माना गया है। इसके चलते 15 मार्च से लेकर 11 जून तक भारत के लिए विनाशकारी समय रहेगा। - फोटो : adobe stock
भारत और पाक की कुंडली
चैत्र मास से ज्येष्ठ मास के बीच 5 शनिवार, 5 रविवार और 5 मंगलवार होने से खप्पर योग बनता है जो कि अशुभ माना गया है। इसके चलते 15 मार्च से लेकर 11 जून तक भारत के लिए विनाशकारी समय रहेगा। इसका सबसे ज्यादा नुकसान पाकिस्तान को उठाना पड़ेगा। पाकिस्तान की कुंडली में केतु लग्न में और सातवें में बुध नीचस्थ है जहां पर शनि और राहु गोचर कर रहे हैं जो संकेत करता है कि पाकिस्तान को भारी नुकसान होगा। क्योंकि नरेंद्र मोदी की कुंडली में मंगल की महादशा के अंतर्गत तृतीय और चतुर्थ भाव के कारक शनि की अंतर्दशा चल रही है जो पंचम भाव में राहु के साथ गोचर कर रहे हैं।

दूसरी ओर भारत की कुंडली में चंद्रमा की महादशा में सूर्य की अंतर्दशा है। तृतीय भाव यानी पराक्रम के स्वामी चंद्रमा है जहां पर चतुर्थ भाव के स्वामी सूर्य उच्च के होकर गोचर में हैं। इस ग्रह गोचर के चलते लघु युद्ध की संभावना बनती है। उल्लेखनीय है कि हिंदू नववर्ष 2082 के राजा सूर्य, मंत्री भी सूर्य हैं। दूसरी ओर वित्त मंत्री बुध, खाद्यमंत्री शुक्र हैं। यह सिद्धार्थ नामक संवत्सर चल रहा है जो कि भारत के लिए शुभ साबित होगा।
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शनि का जब भी उसकी उच्च, नीच, स्वयं की और शत्रु की राशि में गोचर होता है तो देश और दुनिया में भूकंप, तूफान या युद्ध से जनहानि होती है। - फोटो : adobe stock
शनि गोचर का प्रभाव
शनि का जब भी उसकी उच्च, नीच, स्वयं की और शत्रु की राशि में गोचर होता है तो देश और दुनिया में भूकंप, तूफान या युद्ध से जनहानि होती है। शनि ग्रह ने जब 24 जनवरी 2020 में खुद की राशि मकर राशि में प्रवेश किया था, तब दुनिया में कोरोना महामारी के कारण दुनियाभर में लॉकडाउन लग गया था। फिर उसने 29 अप्रैल 2022 को खुद की मूल त्रिकोण राशि कुंभ में प्रवेश किया था तब यूक्रेन-रशिया के बाद इजरायल-हमास का युद्ध प्रारंभ हुआ और दुनियाभर में जन विद्रोह एवं असंतोष की भावना फैल गई।

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वर्ष 2020 के बाद से ही देश और दुनिया के हालात लगातार बदलते और गिरते जा रहे हैं। महामारी, भूकंप, बाढ़, दंगे, विद्रोह, आंदोलन, तख्तापलट, युद्ध, आतंकवाद और महंगाई की चपेट में हर देश है। - फोटो : freepik
इसके बाद शनि बृहस्पति की राशि मीन में 29 मार्च 2025 को जाने वाला था उससे पहले ही यह आशंका व्यक्त की जा रही थी कि देश और दुनिया में भूकंप और युद्ध का नया दौर चलेगा और खासकर भारत के लिए वर्ष 2025 खराब रहने की आशंका व्यक्त की जा रही थी।

वर्ष 2020 के बाद से ही देश और दुनिया के हालात लगातार बदलते और गिरते जा रहे हैं। महामारी, भूकंप, बाढ़, दंगे, विद्रोह, आंदोलन, तख्तापलट, युद्ध, आतंकवाद और महंगाई की चपेट में हर देश है। ऐसा समय करीब 80 वर्ष पहले था जबकि दूसरा विश्व युद्ध प्रारंभ हुआ था।

शनि के मीन राशि में जाने का रिकॉर्ड अच्छा नहीं रहा है। 1937 (द्वितीय विश्व युद्ध की शुरुआत), 1965 (भारत-पाकिस्तान युद्ध) और 1995 (बोस्नियाई युद्ध, जापान में सुनामी) में शनि ने मीन में गोचर किया था। मीन से पहले वह कुंभ और मकर में था तब के हालात भी देखे जा सकते हैं। एक राशि में शनि ढाई साल रहता है। ढाई साल में वह सब कुछ बदलकर रख देता है। अब 2025 में शनि ने फिर से मीन राशि में प्रवेश किया है। मीन से पहले वह कुंभ और मकर में 5 साल रहकर आया है।

आने वाले 5 साल शनि का प्रकोप और बना रहेगा। पांच साल में वह भारत की दशा और दिशा पूर्णत: बदलकर रख देगा और संभवत: पाकिस्तान का नामोनिशान मिटा देगा। ज्योतिषियों का आकलन है कि जब शनि अपनी शत्रु राशि मेष में प्रवेश करेगा तब दुनिया के हालात और भी बुरे हो जाएंगे। शनि देव 3 जून, 2027 को मेष राशि में प्रवेश करेंगे। 3 जून 2027 ऐसा समय है जबकि की भारत में बड़े बदलाव होंगे।
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ज्योतिष के अनुसार बृहस्पति से धरती का मौसम संचालित होता है। इसी के साथ ही वह प्राणियों के जीवन में सुख, शांति और आयु प्रदान करता है परंतु जब बृहस्पति पीड़ित हो जाए तो देश और दुनिया के मौसम के साथ ही शांति भी भंग हो जाती है। - फोटो : adobe
बृहस्पति गोचर का प्रभाव
ज्योतिष के अनुसार बृहस्पति से धरती का मौसम संचालित होता है। इसी के साथ ही वह प्राणियों के जीवन में सुख, शांति और आयु प्रदान करता है परंतु जब बृहस्पति पीड़ित हो जाए तो देश और दुनिया के मौसम के साथ ही शांति भी भंग हो जाती है।

14 मई 2025 से बृहस्पति अपनी अतिचारी चाल चलेंगे। अतिचारी यानी वे तेज एवं सीधी चाल से एक राशि को पार करके समय से पूर्व ही दूरी राशि में प्रवेश करेंगे और वक्री चाल चलते हुए पुन: उसी राशि में लौट आएंगे। इससे धरती के मौसम, जलवायु के साथ ही मानव की सुख एवं शांति पर नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। यह चाल करीब 8 वर्षों तक रहेगी।
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पिछले कुछ वर्ष पहले यानी 2018 से लेकर 2022 तक बृहस्पति 4 राशियों में अतिचारी थे। इसके चलते देश-दुनिया में युद्ध और महामारी का दौर सभी ने देखा है। - फोटो : adobe
बृहस्पति की अतिचारी का रिकॉर्ड खराब रहा है। महाभारत काल में यानी 5000 हजार वर्ष पहले गुरु 7 राशियों में 7 वर्ष तक अतिचारी रहे थे। जिसके चलते महायुद्ध हुआ था। करीब 1000 वर्ष पहले भी गुरु अतिचारी हुए थे तब भी बड़े बदलाव हुए थे। प्रथम और द्वितीय विश्वयुद्ध के समय भी बृहस्पति की असामान्य गति थी।

पिछले कुछ वर्ष पहले यानी 2018 से लेकर 2022 तक बृहस्पति 4 राशियों में अतिचारी थे। इसके चलते देश-दुनिया में युद्ध और महामारी का दौर सभी ने देखा है। अब बताया जा रहा है कि वर्ष 2025 में बृहस्पति की अतिचारी चाल से महायुद्ध होगा। मई 2027 से लेकर जुलाई 2028 तक गुरु की चतुर्थ भाव में गति के चलते भारत की सीमाओं में बड़े पैमाने पर बदलाव होंगे। 
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राहु ने मेष में रहकर युद्ध, आग और तूफानों को जन्म दिया था। इसके बाद राहु ने वर्ष 30 अक्टूबर 2023 में मीन राशि में प्रवेश किया था तभी से देश और दुनिया में युद्ध के नए मोर्चों पर हालात बिगड़ गए हैं। - फोटो : adobe
राहु गोचर का प्रभाव
राहु ने मेष में रहकर युद्ध, आग और तूफानों को जन्म दिया था। इसके बाद राहु ने वर्ष 30 अक्टूबर 2023 में मीन राशि में प्रवेश किया था तभी से देश और दुनिया में युद्ध के नए मोर्चों पर हालात बिगड़ गए हैं। अब 18 मई 2025 को राहु ग्रह बृहस्पति की राशि मीन से निकलकर कुंभ में प्रवेश करेगा। कुंभ में राहु के जाने से देश-दुनिया में राजनीतिक हलचल और तेज हो जाएगी। देश और दुनिया में रोग और शोक बढ़ने की संभावना है।

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मीन राशि में ग्रहों का कुंभ चल रहा है जो कि देश और दुनिया में तबाही मचा रहा है। - फोटो : adobe stock
सात ग्रहों की युति
मीन राशि में ग्रहों का कुंभ चल रहा है जो कि देश और दुनिया में तबाही मचा रहा है। 29 मार्च को सप्तग्रही योग था इसके बाद धीरे धीरे ग्रह कम होते गए। ग्रहों की यह युति अभी एक वर्ष तक और चलेगी। इस युति के चलते देश और दुनिया में राजनीतिक हालात में बदलाव देखने को मिल रहे हैं।
 

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'अंतिम दौर में दुनिया शनि की विलंबित वापसी से नुकसान उठाएगी। साम्राज्य एक काले राष्ट्र के हाथों चला जाएगा। - फोटो : adobe stock
नास्त्रेदमस की भविष्यवाणी
  • 27 अक्टूबर 2025 को मेष के प्रभाव में तीसरी किस्म की जलवायु आएगी, एशिया का राजा मिस्र का भी सम्राट बनेगा। युद्ध, मौतें, नुकसान और ईसाइयों की शर्म के हालात बनेंगे।
  • 'अंतिम दौर में दुनिया शनि की विलंबित वापसी से नुकसान उठाएगी। साम्राज्य एक काले राष्ट्र के हाथों चला जाएगा।
  • 'एक सेनापति उत्सुकतावश पीछे भागती दुश्मन सेना की फौज का पीछा करेगा। वह उसके बचाव चक्र को भेदता हुआ, अंत: उन्हें रोक देगा। वे पैदल भांगेंगे, मगर उनसे अधिक दूर नहीं होगा वह। अंतिम जंग गंगा के किनारे होगी।
  • 'एशिया में वह होगा, जो यूरोप में नहीं हो सकता। एक विद्वान शांतिदूत सभी राष्ट्रों पर हावी होगा।'
  • 'सागरों के नाम वाला धर्म चांद पर निर्भर रहने वालों के मुकाबले तेजी से पनपेगा और उसे भयभीत कर देंगे, 'ए' तथा 'ए' से घायल दो लोग।'
  • 'तीन ओर घिरे समुद्र क्षेत्र में वह जन्म लेगा, जो बृहस्पतिवार को अपना अवकाश दिवस घोषित करेगा। उसकी प्रशंसा और प्रसिद्धि, सत्ता और शक्ति बढ़ती जाएगी और भूमि व समुद्र में उस जैसा शक्तिशाली कोई न होगा।' 
  • पांच नदियों के प्रख्यात द्वीप राष्ट्र में एक महान राजनेता का उदय होगा। इस राजनेता का नाम 'वरण' या 'शरण' होगा। वह एक शत्रु के उन्माद को हवा के जरिए समाप्त करेगा और इस कार्रवाई में छ: लोग मारे जाएंगे।' 
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भविष्य मालिका में लिखा है कि शनि जब मीन राशि में जाएगा तब भारत का समय खराब शुरू होगा। ढाई वर्ष तक अराजकता रहेगी। - फोटो : adobe
संत अच्युतानंद की भविष्य मालिका की भविष्यवाणी
  • भविष्य मालिका में लिखा है कि शनि जब मीन राशि में जाएगा तब भारत का समय खराब शुरू होगा। ढाई वर्ष तक अराजकता रहेगी।
  • एक ओर प्राकृतिक आपदाएं होंगी तो दूसरी ओर होगा महायुद्ध। वहीं लोग बचेंगे तो सत्य और धर्म के मार्ग पर चलेंगे।
  • जब गगन गादी संभालेंगे तब जगन्नाथ का मंदिर समुद्र के जल में डूब जाएगा। मंदिर क्या संपूर्ण ओडिशा में जल प्रलय होगी। 
  • एक संत के हाथों में होगी देश की बागडोर जो अविवाहित होगा। वही संपूर्ण क्षत्रप होगा।
  • जब गगन गादी पर होंगे और ओडिशा के दिव्य सिंह राजा गादी पर होंगे तब भारत पर आक्रमण होगा। 
  • ओडिशा पर जो बम गिराए जाएंगे वह काम नहीं करेंगे। अंत में भारत की जीत होगी।
  • रशिया से सैकड़ों लोग जगन्नाथ जी के दर्शन करने आएंगे और ढेर सारा सोना अर्पित करेंगे।
  • अमेरिका का एक बड़ा हिस्सा जलमग्न हो जाएगा। चीन के कई टुकड़े हो जाएंगे। पाकिस्तान का नामोनिशान ही मिट जाएगा।



डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। 
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