कुंडली में मंगलदोष
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मंगल दोष
जिस भी जातक की कुंडली में मंगल प्रथम, चतुर्थ, सप्तम, अष्टम और द्वादश भाव में है तो उस कुंडली को मांगलिक कुंडली माना जाता है, लेकिन यदि उस भाव या मंगल पर गुरु की दृष्टि पड़ रही है तो मंगल दोष निरस्त हो जाता है। इसी के साथ ही यदि किसी जातक की कुंडली में मंगल दोष है और कुंडली में उसी भाव में सामने शनि, बृहस्पति, राहु या केतु बैठे हों तो तो मांगलिक दोष अपने आप समाप्त हो जाता है।
यदि मांगलिक कुंडली में मंगल के साथ या मंगल पर शुभ ग्रहों की दृष्टि है या शुभ ग्रह केंद्र में हैं तो मांगलिक दोष नहीं लगता है। इस प्रकार से मंगल दोष निरस्त माने जाने की और भी कई स्थितियां बनती हैं। हालांकि अधिकतर ज्योतिष मानते हैं कि मंगल दोष तो अधिकतर कुंडली में होता है।
सिर्फ मंगल देखना सही नहीं है क्योंकि मंगल दोष तो कुछ लोग लग्न से बता देते हैं कुछ ज्योतिष चंद्र कुंडली से बता देते हैं और कुछ कारक यानी शुक्र से भी बता देते हैं। इस प्रकार से तो दुनिया की आधी आबादी को मंगल दोष निकल जाएगा। इसलिए इसे कुंडली मिलान का पूर्ण आधार नहीं मान सकते हैं। यदि अधिकतर लोग मंगल दोष के ही हैं तो फिर मंगल मिलाने की जरूरत नहीं।