फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

कुंडली बताएगी आपको कब और किस अंग में होगी पीड़ा

Thu, 04 Oct 2018 03:13 PM IST
-डॉ. विनय बजरंगी, ज्योतिषाचार्य व कर्म संशोधक
विज्ञापन
1 of 13
कुंडली और रोग
किसी जातक की कुंडली में यदि लग्नेश पापाक्रांत हो, निर्बल हो, पापग्रहों से दृष्ट अथवा युत हो, तो जिस भाव में लग्नेश स्थित है, वहां स्थित राशि शरीर के जिस अंग को प्रदर्शित करती है, उस अंग में पीड़ा होती है। आइए जानते हैं कि किस लग्न के जातक को भविष्य में किस तरह की पीड़ा होने की आशंका बनी रहती है :
विज्ञापन

2 of 13
aries - फोटो : aries
मेष लग्न और मंगल पापाक्रांत हो, तो सिर में दर्द, रक्तचाप में असंतुलन, सिर में चोट लगने का भय बना रहता है।

नीच राशिगत लग्नेश और शारीरिक समस्या
मेष लग्न का स्वामी मंगल, चतुर्थ भाव में काल पुरुष के चतुर्थ अंग से सम्बंधित पीड़ा, फेफड़ों और छाती से सम्बंधित कष्ट देगा।

 
विज्ञापन

3 of 13
taurus - फोटो : taurus
वृष लग्न हो और शुक्र पापाक्रांत हो, तो मुख में विकार उत्पन्न होता है, चेहरे में भी मलिनता आती है।

नीच राशिगत लग्नेश और शारीरिक समस्या
वृषभ लग्न का स्वामी शुक्र पंचम स्थान में नीच राशिगत होकर पंचम भाव से संबंध उदर संबंधी पीड़ा देने वाला होता है।

 

4 of 13
gemini sign
मिथुन लग्न हो और मिथुन लग्न का स्वामी पापाक्रांत हो तो श्वांस की नाली में, स्वर नली में विकार उत्पन्न होता है।

नीच राशिगत लग्नेश और शारीरिक समस्या
मिथुन लग्न का बुध दशम भाव में नीच राशिगत होकर स्थित हो, तो घुटनों में कष्ट देता है, क्योंकि दशम स्थान प्रमुख केंद्र स्थान है, जहां ग्रह बली हो जाते हैं।
विज्ञापन

5 of 13
cancer sign
कर्क लग्न के स्वामी चंद्र के पापाक्रांत होने से फेफड़ों से सम्बंधित कष्ट, प्लूरेसिस, टी.बी., अस्थमा, खांसी जैसी पीड़ा होती है।

नीच राशिगत लग्नेश और शारीरिक समस्या
कर्क लग्न का स्वामी चन्द्रमा पंचम भाव में नीच राशिगत हो, तो उदर में जलीय पीड़ा जैसे जलोदर आदि से कष्ट प्रदान करने वाला होता है। अर्थात जब चन्द्रमा सप्तम भाव में नीच हो, तो जातक के ज्येष्ठ भ्राता के पुत्र को जलोदर सम्बन्धी पीड़ा होती है। ज्येष्ठ भ्राता का स्थान एकादश होता है और उसका पुत्र उसके स्थान से पंचम अर्थात जन्मांग का तृतीय स्थान हुआ। तृतीयाधिपति चन्द्रमा जब नीच होगा, तो उपर्युक्त नियमानुसार उदर में कष्ट प्रदान करेगा।
विज्ञापन

6 of 13
leo - फोटो : leo
सिंह लग्न के लिए लग्नाधिपति सूर्य के पापाक्रांत होने पर ह्रदय और ऊपरी उदर से सम्बंधित कष्ट होता है।

नीच राशिगत लग्नेश और शारीरिक समस्या
सिंह लग्न का स्वामी सूर्य यदि तृतीय भाव में नीच राशिगत हो, तो बांह अथवा श्वास की नली में कष्ट प्रदान करता है लेकिन उसका असर कम रहता है।
विज्ञापन

7 of 13
virgo
कन्या लग्न हो और लग्न का स्वामी बुध पापाक्रांत हो, तो उदर पीड़ा, बड़ी आंत से सम्बंधित विकार संभव होता है।

नीच राशिगत लग्नेश और शारीरिक समस्या
कन्या लग्न का स्वामी सप्तम भाव में नीच राशिगत हो, तो वीर्य सम्बन्धी दोष उत्पन्न करता है।

8 of 13
libra
तुला लग्न हो और लग्नेश शुक्र पापाक्रांत हो, तो जननेन्द्रियों में कष्ट होता है। गौरतलब है कि शुक्र गर्भाशय, वीर्य और सौंदर्य का कारक ग्रह है| यदि शुक्र पापाक्रान्त होगा, तो इससे सम्बंधित विकार भी उत्पन्न होंगे।

नीच राशिगत लग्नेश और शारीरिक समस्या
तुला लग्न का स्वामी शुक्र, यदि द्वादश भावगत होकर नीच राशिगत हो, तो नेत्रों तथा पैरों में अल्प कष्ट देता है।

9 of 13
scorpio
वृश्चिक लग्न हो, तो उसका स्वामी मंगल अंडकोष और जननेन्द्रियों, नितम्ब आदि में फोड़े-फुंसी अथवा  चोट-चपेट से सम्बंधित कष्ट प्रदान करता है।

नीच राशिगत लग्नेश और शारीरिक समस्या
वृश्चिक लग्न का स्वामी मंगल यदि नवम भाव में नीच राशिगत होकर स्थित हो, तो नितम्ब में कष्ट देता है।

10 of 13
sagittarius
धनु लग्न हो और उसका स्वामी बृहस्पति पापाक्रांत हो, तो जांघों में कष्ट होता है।

नीच राशिगत लग्नेश और शारीरिक समस्या
धनु लग्न का स्वामी बृहस्पति, यदि द्वितीय स्थान में नीच राशिगत स्थित हो, तो मुख में कोई कष्ट या पीड़ा देता है।

11 of 13
capricorn
मकर लग्न हो और लग्न का स्वामी शनि पापाक्रांत हो, तो घुटनों में कष्ट और दर्द होता है। चलने-फिरने में असुविधा होती है| गठिया जैसे विकार होते हैं।

नीच राशिगत लग्नेश और शारीरिक समस्या
मकर लग्न का स्वामी शनि चतुर्थ स्थान में नीच राशिगत होकर स्थित हो, तो छाती की पीड़ा देता है।

12 of 13
aquarius
कुम्भ लग्न हो और लग्न का स्वामी पापाक्रांत हो, तो पिंडलियों में विकार होता है। पिंडलियों कि नसें उभर आती हैं और एक विशेष प्रकार की पीड़ा से जातक पीड़ित होता है, जिसमे निचले पैर में बहुत कष्ट अथवा दर्द होता है।

नीच राशिगत लग्नेश और शारीरिक समस्या
कुम्भ लग्न का स्वामी शनि यदि तृतीय स्थान में नीच राशिगत होकर स्थित हो, तो श्वांस की नली में पीड़ा प्रदान करता है।
विज्ञापन

13 of 13
pisces
मीन लग्न हो और लग्न का स्वामी बृहस्पति पापाक्रांत हो, तो पैर के पंजों में, तलवों में और पैर की उंगलियों में कष्ट की आशंका बनी रहती है।

नीच राशिगत लग्नेश और शारीरिक समस्या
मीन लग्न का स्वामी बृहस्पति, यदि एकादश स्थान में नीच राशिगत हो, तो पैरों की पिंडलियों में यदा-कदा कष्ट होता है, परन्तु अधिक नहीं होता, क्योंकि बृहस्पति एकादश स्थान में सर्वाधिक शुभ स्वीकारा गया है।

 
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें