cancer sign
कर्क लग्न के स्वामी चंद्र के पापाक्रांत होने से फेफड़ों से सम्बंधित कष्ट, प्लूरेसिस, टी.बी., अस्थमा, खांसी जैसी पीड़ा होती है।
नीच राशिगत लग्नेश और शारीरिक समस्या
कर्क लग्न का स्वामी चन्द्रमा पंचम भाव में नीच राशिगत हो, तो उदर में जलीय पीड़ा जैसे जलोदर आदि से कष्ट प्रदान करने वाला होता है। अर्थात जब चन्द्रमा सप्तम भाव में नीच हो, तो जातक के ज्येष्ठ भ्राता के पुत्र को जलोदर सम्बन्धी पीड़ा होती है। ज्येष्ठ भ्राता का स्थान एकादश होता है और उसका पुत्र उसके स्थान से पंचम अर्थात जन्मांग का तृतीय स्थान हुआ। तृतीयाधिपति चन्द्रमा जब नीच होगा, तो उपर्युक्त नियमानुसार उदर में कष्ट प्रदान करेगा।