वैसे तो सारी दुनिया के लोग नया वर्ष 1 जनवरी को मनाते हैं, लेकिन वैदिक परंपरा और भारतीय कैलेंडर के अनुसार नया साल चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि पर मनाया जाता है। जिसे नव संवत्सर भी कहते हैं। चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से ही वासंती नवरात्र की शुरुआत भी होती है। इस बार यह 25 मार्च से आरंभ हो रहा है।
नव संवत्सर 2077 और वार्षिक राशिफल
वर्तमान ‘रूद्र’ विंशति का परिधावी नामक संवत्सर विदा हो रहा है और 'प्रमादी' नामक संवत्सर का शुभारंभ होने वाला है जिसके राजा बुध और मंत्री चंद्र हैं। जिसके फलस्वरूप देश की अर्थव्यवस्था एवं प्रशासनिक व्यवस्था को सुदृढ़ बनाए रखना सरकार के लिए कठिन तो रहेगा, किंतु भारत सरकार इसमें पूर्ण तरह सफल रहेगी। 6 अप्रैल से 'आनंद' नामक संवत्सर का भी शुभारंभ हो जाएगा जो भारतवर्ष की समृद्धि के लिए शुभ साबित होगा। नववर्ष का आरंभ बुधवार के दिन रेवती नक्षत्र, और मीन राशिगत चंद्रमा के गोचर के समय में हो रहा है अतः देश के लिए यह संयोग अति शुभ रहेगा, यही नहीं यह संयोग भारतवर्ष के आर्थिक विकास, विज्ञान एवं टेक्नोलॉजी में उन्नति, सामाजिक व्यवस्था और शिक्षा के क्षेत्र में नए मील का पत्थर साबित होगा। प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य पं जयगोविंद शास्त्री बता रहे हैं आपके लिए इस संवत्सर में राजा बुध और मंत्री चंद्रमा के संयोग का फल कैसा रहेगा, इसका ज्योतिषी विश्लेषण...