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Guru Vakri 2025: कर्क राशि में गुरु हुए वक्री, इन राशि वालों को मुश्किलों का करना पड़ेगा सामना

Mon, 10 Nov 2025 04:03 PM IST
विनोद शुक्ला ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला

सार

Guru Vakri 2025: सुख और ज्ञान के कारक माने जाने वाले गुरु 11 नवंबर 2025 को शाम 06 बजकर 31 मिनट पर कर्क राशि में वक्री होने वाले हैं। कर्क राशि में गुरु उच्च के होते हैं। वैदिक ज्योतिष में गुरु को भाग्य, प्रगति और ज्ञान का कारक माना जाता है।
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Guru Vakri 2025 - फोटो : अमर उजाला
Guru Vakri 2025:  वैदिक ज्योतिष शास्त्र में गुरु ग्रह का विशेष महत्व होता है। गुरु एक राशि में करीब 13 महीनों तक रहते हैं फिर इसके बाद दूसरी राशि में गोचर करते हैं। इस साल गुरु अतिचारी होकर संचरण कर रहे हैं जिसके चलते गुरु की चाल तेज है। सुख और ज्ञान के कारक माने जाने वाले गुरु 11 नवंबर 2025 को शाम 06 बजकर 31 मिनट पर कर्क राशि में वक्री होने वाले हैं। कर्क राशि में गुरु उच्च के होते हैं। वैदिक ज्योतिष में गुरु को भाग्य, प्रगति और ज्ञान का कारक माना जाता है। गुरु के कुंडली में शुभ होने पर व्यक्ति जीवन में खूब धन,मान-सम्मान और पद-प्रतिष्ठा की प्राप्ति करता है। गुरु के वक्री होने पर कुछ राशि वालों को सावधान तो कुछ राशि वालों को अच्छा लाभ मिलने के योग हैं। आइए जानते हैं गुरु के कर्क राशि में वक्री होने किन राशियों को सावधान रहना होगा। 
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मेष राशि - फोटो : amar ujala
मेष राशि
मेष राशि वालों के लिए गुरु आपके चौथे भाव में वक्री होने जा रहे हैं। गुरु आपकी कुंडली में नवम और द्वादश भाव के स्वामी है। ऐसे में गुरु का कर्क राशि में वक्री होना आपके कार्यो में बाधाएं ला सकता है। आपके आधूरे काम गुरु के वक्री होने से आपके काम का बोझ बढ़ सकता है। इस दौरान आपको धन हानि होने की संभावना है। कामकाज में आपको कुछ न कुछ दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है। 

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वृषभ राशि - फोटो : amar ujala
वृषभ राशि
वृषभ राशि के जातकों के लिए गुरु आपकी कुंडली के नवम और ग्यारहवें भाव के स्वामी होते हैं और यह अब आपके तीसरे भाव में वक्री होने जा रहे हैं। इस दौरान कार्य में देरी होगी और बनते हुए काम बिगड़ेंगे। गुरु के वक्री होने से करियर के क्षेत्र में नौकरी बदलने को मजबूर हो सकते हैं। आर्थिक हानि होने की संभावना है।  
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मिथुन राशि - फोटो : amar ujala
मिथुन राशि
मिथुन राशि के जातकों के लिए गुरु आपकी कुंडली के सातवें और दशम भाव के स्वामी होते हैं। गुरु के कर्क राशि में वक्री होने से यह आपके दूसरे भाव में वक्री होंगे। आपके लिए करियर में मुश्किलों को सामना करना पड़ सकता है। कार्यक्षेत्र में आपको अधिकारियों से जूझना पड़ सकता है। आर्थिक जीवन में महत्वपूर्ण बदलाव देखने को मिल सकता है। 
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