ज्योतिष में ग्रहों का गोचर, वक्री, मार्गी, उदय और अस्त होना एक खास घटना मानी जाती है। ग्रहों की चाल और दशा में बदलाव आने पर इसका शुभ-अशुभ प्रभाव जातकों के साथ-साथ देश दुनिया पर भी पड़ता है। कुछ ग्रह बहुत जल्दी ही अपनी राशि बदल लेते हैं तो कुछ वर्षों तक एक ही राशि में रहते हैं। वैदिक ज्योतिष में देवगुरु बृहस्पति को शुभ और फलदाता ग्रह माना गया है। गुरु ग्रह ज्ञान, सुख, शिक्षा, विवाह और वैभव के कारक ग्रह माने हैं। गुरु ग्रह करीब 13 महीनों में अपनी राशि बदलते हैं। आपको बता दें कि गुरु 01 मई 2024 से शुक्र की राशि वृषभ राशि में विराजमान हैं। गुरु इस साल भी इसी राशि में विराजमान रहेंगे फिर अगले साल यानी 2025 तक भी रहेंगे। गुरु साल 2025 में वृषभ राशि से निकलकर मिथुन राशि में प्रवेश करेंगे। जहां पर यह वक्री होकर कई राशियों को प्रभावित करेंगे।
गुरु की वक्री चाल कब
शुभता और ज्ञान के कारक गुरु 9 अक्तूबर 2024 को सुबह मिथुन राशि में वक्री चाल से गोचर कर जाएंगे। ये 4 फरवरी 2025 तक एक बार फिर से मार्गी अवस्था में आ जाएंगे। गुरु की वक्री चाल कुछ राशि वालों के लिए शुभता लेकर आ सकती है। आइए जानते हैं कौन-कौन सी हैं ये राशियां।