शक्ति का रहस्य (मस्तिष्क का विज्ञान)
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शक्ति का रहस्य (मस्तिष्क का विज्ञान)
इस महामंत्र में 24 अक्षर हैं, जो 24 शक्ति बीजों के समान हैं। इसके निरंतर उच्चारण से मस्तिष्क का न्यूरो-पैटर्न (तंत्र) बदल जाता है, जिससे मानसिक शक्तियां जाग्रत होती हैं। पौराणिक संदर्भों के अनुसार, इसी मंत्र के प्रचंड बल से महर्षि विश्वामित्र ने एक नई सृष्टि तक की रचना कर डाली थी। यजुर्वेद में इसे एक 'दिव्य वृषभ' (बैल) के रूप में रूपक दिया गया है, जिसके चार सींग (चार वेद), तीन पैर (8-8 अक्षरों के चरण), दो सिर (ज्ञान-विज्ञान) और सात हाथ (सात व्याहृतियां) हैं। जब यह साधक के भीतर दहाड़ता है, तो देवत्व का उदय होता है।