गजानन के कई अवतार हो चुके हैं। लेकिन पुराणों में इनके 12 अवतारों का विशेष जिक्र किया गया है और बताया है कि हर अवतार का अलग-अलग राशियों से संबंध है इसलिए अपनी राशि के अनुसार गणेश जी के अलग-अलग अवतारों को ध्यान और पूजन करना चाहिए। तो आइये जानें राशि के अनुसार गणेश जी के 12अवतारों में से आप किसकी करें पूजा।
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पुराणों के अनुसार गणेश जी के ये हैं 12 अवतार, राशि के अनुसार करें इनकी पूजा
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वक्रतुंड
गणेश जी का पहला अवतार है वक्रतुंड कहलाता है जिनकी सवारी सिंह है। गणेश जी का यह अवतार मनुष्य के अंदर बैठे द्वेष को दूर करके सफल इंसान बनाने में सहायक होता है। मेष राशि वालों को गणेश जी के इस अवतार की पूजा करनी चाहिए।
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एकदंत
गणेश जी का दूसरा अवतार है एकदंत। एक दांत होने के कारण गणेश जी अपने इस अवतार में एक दंत के नाम से जाने जाते हैं। इनका वाहन मूषक है और यह मनुष्य के अंदर विराजमान अहंकार को दूर करके मनुष्य को समाज में मान-सम्मान दिलाते हैं। वृष राशि के व्यक्तियों को गणेश जी के इस अवतार की पूजा करनी चाहिए।
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महोदर
गणेश जी अपने तीसरे अवतार में महोदर कहलाते हैं। इनका वाहन मूषक है और यह मनुष्य में मौजूद मोह, अज्ञान और दुर्बुद्धि का अंत करते हैं। मिथुन राशि के व्यक्तियों को गणेश जी के इस स्वरूप की पूजा करनी चाहिए।
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गणेश्ा गजानन
गणेश जी अपने चौथे अवतार में गजानन कहलाते हैं। गणेश जी का यह अवतार कुबेर के पुत्र लोभ का अंत करने के लिए हुआ है। मनुष्य के अंदर लोभ को अंत करने के लिए गणेश जी के इस रूप की पूजा विशेष फलदाययी होती है। कर्क राशि के व्यक्तियों को गणेश जी के इस अवतार की पूजा करनी चाहिए।
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लंबोदर
लंबोदर के नाम से गणेश जी अपने पांचवें अवतार में जाने जाते हैं। क्रोधासुर यानी मनुष्य के अंदर विराजमान क्रोध का अंत करने वाले यह गणेश जी हैं। सिंह राशि वालों को गणेश जी के इस स्वरूप की पूजा करनी चाहिए।
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गणेश्ा
गणेश जी अपने छठे अवतार में विकट दिखते हैं इसलिए इनके इस अवतार का नाम ही विकट है। गणेश जी अपने इस अवतार से मनुष्य में मौजूद काम भाव का अंत करते हैं। कन्या राशि वालों को गणेश जी के इस अवतार की पूजा करनी चाहिए।
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गणेश
गणेश जी का सातवां अवतार है विघ्नराजा का। अपने नाम के अनुसार ही गणेश जी का यह अवतार भक्तों के विघ्नों को दूर करने वाला है। अपने इस अवतार में गणेश जी शेषनाग पर विराजमान होते हैं और अहं का अंत करते हैं। तुला राशि वालों को गणेश जी के इस अवतार की पूजा करनी चाहिए।
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गणेश्ा भ्ागवान
धूम्रवर्ण गणेश जी के आठवें अवतार हैं। इनकी सवारी घोड़ा है और यह मनुष्य में मौजूद अभिमान का अंत करने वाले हैं। वृश्चिक राशि वालों को इनकी पूजा करनी चाहिए।
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गणेश्ा
गणेश पुराण के अनुसार हर युग में गणेश जी का एक अवतार होगा और अब तक इनके तीन अवतार हो चुके हैं। सतयुग में गणेश जी ने महोत्कट अवतार लिया था। इस अवतार में गणेश जी ने धूम्रराक्षस, देवांतक और नरांतक का वध करके धर्म की रक्षा की। धनु राशि वालों को इनकी पूजा करनी चाहिए।
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बल्लालेश्वर विनायक
त्रेतायुग में भगवान शिव और पार्वती के पुत्र के रूप में गणेश जी ने अवतार लिया और यह मयुरेश्वर कहलाए। इन्होंने इस अवतार में सिंधु नाम के असुर का अंत किया और अपने भाई कार्तिकेय को मयूर वाहन भेंट कर दिया। मकर राशि वालों को इनकी पूजा करनी चाहिए।
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गणेश
द्वापर युग में गणेश जी गजानन हुए और इन्होंने सिंदुरासन नाम के असुर का अंत किया। कुंभ राशि वालों को इनकी पूजा करनी चाहिए।
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गणेश
गणेश जी का 12वां अवतार धूम्रकेतु नाम से होगा जिनका रंग धुएं के समान होगा। इनका वाहन अश्व होगा। इस अवतार में कई असुरों का वध करके गणेश जी कलियुग का अंत करेंगे।