गजकेसरी राजयोग को गुरु और चंद्रमा की अनुकूल स्थिति से बनने वाला एक शुभ योग माना जाता है।
- फोटो : adobe stock
क्या होता है गजकेसरी राजयोग?
वैदिक ज्योतिष में गजकेसरी राजयोग को गुरु और चंद्रमा की अनुकूल स्थिति से बनने वाला एक शुभ योग माना जाता है। पारंपरिक मान्यता के अनुसार, जब गुरु चंद्रमा से पहले, चौथे, सातवें या दसवें भाव में स्थित होते हैं, तो गजकेसरी योग बन सकता है। गुरु को ज्ञान, विवेक, विस्तार और समृद्धि का कारक माना जाता है, जबकि चंद्रमा मन, भावनाओं और मानसिक स्थिति का प्रतिनिधित्व करते हैं। इन दोनों ग्रहों की अनुकूल स्थिति को आत्मविश्वास, सामाजिक प्रतिष्ठा, आर्थिक प्रगति और निर्णय लेने की क्षमता से जोड़कर देखा जाता है। हालांकि, योग का फल केवल ग्रहों की युति से तय नहीं होता। जन्मकुंडली में ग्रहों की स्थिति, उनकी शक्ति, दृष्टि और अन्य ज्योतिषीय परिस्थितियां भी महत्वपूर्ण मानी जाती हैं।