Gajkesari Rajyog 2026: वैदिक पंचांग के अनुसार, 11 अगस्त से चंद्रमा कर्क राशि में विराजमान हैं, जहां पर पहले से देवगुरु बृहस्पति मौजूद हैं। इस तरह से कर्क राशि में चंद्रमा-गुरु की युति से गजकेसरी योग बना हुआ है। ज्योतिष में गजकेसरी योग को बहुत ही शुभ और लाभकारी माना जाता है। वैदिक ज्योतिष शास्त्र में चंद्रमा सभी ग्रहों में सबसे तेज गति से चलने वाला ग्रह माना जाता है, जो एक राशि में करीब ढाई वर्षों तक रहते हैं। ज्योतिष में चंद्रमा को मन, माता, मानसिक शांति और सुख का कारक माना जाता है। ऐसे में जब भी चंद्रमा और गुरु की युति होती है तो इसका प्रभाव सभी राशियों के जातकों के ऊपर देखने को मिलेगा। चंद्रमा-गुरु की युति से जहां गजकेसरी राजयोग का निर्माण हुआ है वहीं इसके साथ ही शशि आदित्य, गुरु आदित्य, चंद्र-बुध और हंस राजयोग का भी निर्माण हो रहा है। गजकेसरी राजयोग के बनने से सबसे ज्यादा लाभ तीन राशि के जातकों को ऊपर देखने को मिलेगा।