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Falgun Pradosh Vrat 2025: कब रखा जाएगा फाल्गुन माह का प्रथम प्रदोष व्रत है? जानें तिथि और मुहूर्त

Wed, 19 Feb 2025 11:59 AM IST
ज्योति मेहरा ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

कहा जाता है कि प्रदोष व्रत को करने से भगवान शिव प्रसन्न होते हैं और भक्तों की सभी इच्छाओं की पूर्ति करते हैं। इस बार फाल्गुन मास का प्रदोष व्रत विशेष महत्व रखता है। आइए जानें इसका कारण।
 
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Pradosh Vrat 2025 - फोटो : अमर उजाला
Pradosh Vrat: हिंदू पंचांग के अनुसार प्रत्येक महीने के कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि को प्रदोष व्रत का पालन किया जाता है। यह व्रत भगवान शिव को समर्पित होता है। इस दिन उपवास रखते हुए संध्या समय, जिसे गोधूलि बेला कहा जाता है, भगवान भोलेनाथ की पंचोपचार या षोडशोपचार पद्धति से पूजा करना शुभ माना जाता है। ऐसा कहा जाता है कि इस व्रत को करने से भगवान शिव प्रसन्न होते हैं और भक्तों की सभी इच्छाओं की पूर्ति करते हैं। इस बार फाल्गुन मास का प्रदोष व्रत विशेष महत्व रखता है। आइए जानें इसका कारण।
 

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फाल्गुन मास के प्रदोष व्रत का महत्व - फोटो : freepik
फाल्गुन मास के प्रदोष व्रत का महत्व
इस वर्ष महाशिवरात्रि से एक दिन पूर्व प्रदोष व्रत रखा जाएगा। फाल्गुन मास का पहला प्रदोष व्रत 25 फरवरी को पड़ रहा है। इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करने से जीवन के कष्टों और दुखों का नाश होता है। इस बार प्रदोष व्रत करने वालों के लिए यह ध्यान रखना आवश्यक है कि अगले दिन महाशिवरात्रि का व्रत भी रखा जाएगा।
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त्रयोदशी तिथि का समय - फोटो : अमर उजाला
त्रयोदशी तिथि का समय
फाल्गुन मास की त्रयोदशी तिथि 25 फरवरी को दोपहर 12:47 बजे से प्रारंभ होगी और अगले दिन 26 फरवरी को प्रातः 11:08 बजे समाप्त होगी। चूंकि प्रदोष व्रत में भगवान शिव की पूजा प्रदोष काल में की जाती है, इसलिए इस वर्ष व्रत 25 फरवरी को रखा जाएगा।

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शुभ योगों का निर्माण - फोटो : अमर उजाला
शुभ योगों का निर्माण
इस बार की त्रयोदशी तिथि पर विशेष योग बन रहे हैं, जो इसे और भी शुभ बनाते हैं। इस दिन त्रिपुष्कर योग और वरियान योग का संयोग बन रहा है, जो दुर्लभ माने जाते हैं। साथ ही उत्तराषाढ़ा नक्षत्र भी रहेगा। इन योगों के प्रभाव से भगवान शिव की आराधना करने पर विशेष फल की प्राप्ति होगी और जीवन की कठिनाइयों से छुटकारा मिलेगा।
 

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प्रदोष व्रत पर क्या करें? - फोटो : अमर उजाला
प्रदोष व्रत पर क्या करें?
इस दिन व्रत रखकर संध्या के समय भगवान शिव की विशेष पूजा करें। यदि साधक षोडशोपचार विधि से पूजन कर शिवलिंग का दूध से अभिषेक करता है, तो भगवान शिव की कृपा प्राप्त होती है और सभी बाधाएं दूर होती हैं।
 

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डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): ये लेख लोक मान्यताओं पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।
 
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