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Sankashti Chaturthi Feb 2025: फरवरी में कब रखा जाएगा द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी व्रत? जानें तिथि और मुहूर्त

Fri, 14 Feb 2025 01:30 PM IST
ज्योति मेहरा ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

फाल्गुन माह में आने वाली कृष्ण पक्ष की संकष्टी चतुर्थी को द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी कहा जाता है। इस दिन भगवान गणेश के द्विजप्रिय स्वरूप की विशेष पूजा-अर्चना की जाती है।
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द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी का महत्व - फोटो : Amar Ujala
Sankashti Chaturthi Vrat 2025: हिंदू धर्म में संकष्टी चतुर्थी व्रत को विशेष शुभ और फलदायी माना जाता है। इस व्रत का अर्थ ही "संकटों से मुक्ति" है। प्रत्येक मास में दो बार गणेश चतुर्थी का व्रत रखा जाता है, कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को संकष्टी श्री गणेश चतुर्थी और शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को विनायक श्री गणेश चतुर्थी के रूप में मनाया जाता है। यह व्रत भगवान गणेश के प्रति श्रद्धा व्यक्त करने और जीवन में सुख-समृद्धि की प्राप्ति के लिए किया जाता है।

द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी का महत्व
फाल्गुन माह में आने वाली कृष्ण पक्ष की संकष्टी चतुर्थी को द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी कहा जाता है। इस दिन भगवान गणेश के द्विजप्रिय स्वरूप की विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस व्रत को करने से भगवान गणेश की कृपा प्राप्त होती है और जीवन की सभी बाधाएं दूर हो जाती हैं। 

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द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी - फोटो : freepik
द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी 2025 व्रत तिथि एवं शुभ मुहूर्त
व्रत तिथि- 16 फरवरी 2025 (रविवार)
चतुर्थी तिथि प्रारंभ- 15 फरवरी 2025, रात 11:52 बजे
चतुर्थी तिथि समाप्त- 17 फरवरी 2025, रात 2:15 बजे
चंद्रोदय का समय- 16 फरवरी, रात 9:51 बजे

संकष्टी चतुर्थी के दिन भक्त गण भगवान गणेश की आराधना कर चंद्र दर्शन के बाद व्रत का पारण करते हैं। 
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द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी - फोटो : freepik
द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी व्रत की विधि
स्नान और संकल्प-
प्रातःकाल स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें और व्रत का संकल्प लें।
पूजा स्थल की तैयारी- गणपति बप्पा की मूर्ति या चित्र को स्वच्छ स्थान पर स्थापित करें।
गणेश जी की पूजा- धूप, दीप, अक्षत, फूल, दूर्वा, रोली, मोदक और पंचामृत से भगवान गणेश की पूजा करें।
"ॐ गं गणपतये नमः" मंत्र का जाप करें। संकष्टी गणेश चतुर्थी व्रत कथा का पाठ करें।

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द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी व्रत की विधि - फोटो : freepik
आरती और भोग- गणेश चालीसा का पाठ करें और आरती करें। गणेश जी को मोदक और लड्डू का भोग अर्पित करें।
चंद्र दर्शन और व्रत पारण- रात्रि में चंद्रोदय के बाद चंद्रमा को अर्घ्य देकर व्रत का पारण करें।

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संकष्टी चतुर्थी व्रत के लाभ - फोटो : freepik
संकष्टी चतुर्थी व्रत के लाभ
  • जीवन के सभी संकटों का नाश होता है।
  • सुख-समृद्धि, सौभाग्य और धन की प्राप्ति होती है।
  • दांपत्य जीवन में मधुरता आती है।
  • विद्यार्थियों के लिए बुद्धि और विद्या में वृद्धि होती है।
  • कार्यों में आ रही रुकावटें दूर होती हैं।



डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): ये लेख लोक मान्यताओं पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।
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